Yashwant Singh : बनारस को जो लोग हिंदुत्व का गढ़ और भाजपा के लिए सबसे सुरक्षित सीट मानकर चल रहे हैं उन्हें बताना चाहूंगा कि बनारस वाले जैसा दिखते हैं, वैसा होते नहीं… याद करिए उन दिनों को जब आडवाणी हिंदू रथ पर सवार होकर देश भर में सांप्रदायिकता की आग फैला रहे थे.. तब बनारसियों ने आडवाणी और उनके रथ को लेकर ऐसी ऐसी कविताएं, मुहवारे, गाने, कविताएं बनाए थे कि सुन कर हंसते हंसते लोट पोट हो जाएं…
ये अजीब मिजाज का शहर है… मोदी अगर यहां से लड़ गए और उनके मुकाबले केजरीवाल खड़े हो गए तो लिख कर ले लीजिए… केजरीवाल जीतेंगे… बनारसी गुरुओं की आत्मा बड़ी मौलिक होती है… वो हीरों को पहचान लेते हैं.. वो धोखे को दूर से तड़ लेते हैं.. भांति भांति के 'ठगों' को पैदा करने वाली काशी नगरिया के निवासियों को ठगना आसान नहीं… दिन भर मौलिक चिंतन करते रहने वाले बनारसियों को पता है कि केजरीवाल वो घोड़ा है जो भाजपा और कांग्रेस जैसे पैदाइशी राजनीतिबाज और घोटालेबाज दलों के राजपाठ में सेंध लगाकर कुछ नया आड़ोलन, हलचल, लहर पैदा कर सकता है…. और कर भी रहा है…. सच में, अगर परम आदरणीय केजरीवाल भाई साहब साल भर से राजनीति में न रहते तो ये चुनाव कितने बोरिंग होते …
हर हर महादेव..
दो लाइन बनारसी अंदाज में…
आवे द ससुरा इ मोदिया के
भगा देवल जाइ खोदिया के
केजरीवलवा ठोंकले रह ताल
तूहीं जितबे बजउले रह गाल
गुरु, इ हमार मौलिक रचना बा, दाद खाज खुजली वाल तक का इंतजार रहेगा 🙂
भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.






