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केजरीवाल अगर पीएम बन गए तो कांग्रेस से भी ज़्यादा बुरी तरह बेच सकते हैं देश को

Tara Shanker : केजरीवाल भक्तों आँखें खोलो! जो बंदा कॉर्पोरेट्स की इतनी खुली नुमाइंदगी करता हो, उससे आप भ्रष्टाचार दूर करने का भ्रम पाल बैठे हैं! जिस Laissez-faire की अंधी आर्थिक सोच ने पूरी दुनिया में इतनी तबाही मचाई कि पूरा उपनिवेशीकरण, दो-दो विश्वयुद्ध और अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देश आज दादागिरी जमाये हुए हैं, उसी सोच को आगे बढ़ने की कोशिश ये केजरीवाल किये जा रहे हैं!  जिस बंदे को भ्रष्टाचार की परिभाषा भी नहीं मालूम, जिसको ये भी नहीं मालूम कि भ्रष्टाचार की जड़ कहाँ हैं, उससे आप भ्रष्टाचार-मुक्त भारत चाहते हैं! जिस प्रकार CII कांफ्रेंस में केजरीवाल ने बयान दिया उससे तो साफ़ ज़ाहिर है कि अगर वो प्रधानमंत्री बन गए तो कांग्रेस से भी ज़्यादा बुरी तरह बेच सकते हैं देश को! बाकी आप जानो, आपकी समझ जाने!

(जेएनयू में अध्ययनरत तारा शंकर के फेसबुक वॉल से.)

Tara Shanker : केजरीवाल भक्तों आँखें खोलो! जो बंदा कॉर्पोरेट्स की इतनी खुली नुमाइंदगी करता हो, उससे आप भ्रष्टाचार दूर करने का भ्रम पाल बैठे हैं! जिस Laissez-faire की अंधी आर्थिक सोच ने पूरी दुनिया में इतनी तबाही मचाई कि पूरा उपनिवेशीकरण, दो-दो विश्वयुद्ध और अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देश आज दादागिरी जमाये हुए हैं, उसी सोच को आगे बढ़ने की कोशिश ये केजरीवाल किये जा रहे हैं!  जिस बंदे को भ्रष्टाचार की परिभाषा भी नहीं मालूम, जिसको ये भी नहीं मालूम कि भ्रष्टाचार की जड़ कहाँ हैं, उससे आप भ्रष्टाचार-मुक्त भारत चाहते हैं! जिस प्रकार CII कांफ्रेंस में केजरीवाल ने बयान दिया उससे तो साफ़ ज़ाहिर है कि अगर वो प्रधानमंत्री बन गए तो कांग्रेस से भी ज़्यादा बुरी तरह बेच सकते हैं देश को! बाकी आप जानो, आपकी समझ जाने!

(जेएनयू में अध्ययनरत तारा शंकर के फेसबुक वॉल से.)

Siddharth Kalhans : बाजार ही सब तय करता है। सही है। देखो न आम आदमी शब्द का व्यापार कितना चोखा है। पाखंड के सहारे बाजार में हिट हो गया न आम आदमी। अब भी लोग लहा लौट हो रहे हैं, थपौड़ी (ताली) मार मार। जरा पूंछो तो ये तथाकथित आम आदमी क्या हैं वाकई में। ये आम आदमी दलित नही, अक्लियत, माइनारिटी नही, गरीब पिछड़ा नही, आदिवासी नही। चिकने चेहरे वाला मध्य वर्ग है। वो भी केंद्र में नही। आम आदमी का नेता आईआईटी से निकला, मंहगी नौकरी से वीआरएस लेने वाला, बड़े व्यापार मे माल कमा अब ईमानदार नैतिक होने का ढोंग करने वाला। सब आम आदमी ही है।

(लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस के फेसबुक वॉल से.)

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