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केजरीवाल से अपील- सबको मिले निःशुल्क इलाज का अधिकार

Yashwant Singh : देवरिया, बलिया, बनारस की यात्रा के बाद दिल्ली लौट रहा हूं. इस बीच केजरीवाल ने जनता से रायशुमारी में सरकार बनाने का आदेश लेने के बाद आगे कदम बढ़ा दिया है, सत्ता अपने हाथ में लेने को वास्ते. पहला बड़ा व प्रतीकात्मक काम भी कर दिया. दिल्ली पुलिस के लोग जब सुरक्षा देने के लिए फौज फाटे के साथ पहुंचे तो उन्होंने बैरंग लौटा दिया. इसे कहते हैं आम आदमी का नेता होना. पर अभी बहुत कुछ करना बाकी है. उम्मीद करते हैं बिजली और पानी वाले अपने वादे को अरविंद शीघ्र से फौरन पूरा करेंगे. अगर यही दो काम कर दिया तो जनता उन्हें इतिहास पुरुष समझेगी.

Yashwant Singh : देवरिया, बलिया, बनारस की यात्रा के बाद दिल्ली लौट रहा हूं. इस बीच केजरीवाल ने जनता से रायशुमारी में सरकार बनाने का आदेश लेने के बाद आगे कदम बढ़ा दिया है, सत्ता अपने हाथ में लेने को वास्ते. पहला बड़ा व प्रतीकात्मक काम भी कर दिया. दिल्ली पुलिस के लोग जब सुरक्षा देने के लिए फौज फाटे के साथ पहुंचे तो उन्होंने बैरंग लौटा दिया. इसे कहते हैं आम आदमी का नेता होना. पर अभी बहुत कुछ करना बाकी है. उम्मीद करते हैं बिजली और पानी वाले अपने वादे को अरविंद शीघ्र से फौरन पूरा करेंगे. अगर यही दो काम कर दिया तो जनता उन्हें इतिहास पुरुष समझेगी.

एक अन्य काम बहुत जरूरी है. वह है हर व्यक्ति के इलाज को निःशुल्क बनाना. जब तक स्वास्थ्य का खर्च सरकार नहीं उठाती, तब तक जनता के जीने का अधिकार बेमानी है. जिस तरह खाना, शिक्षा किसी व्यक्ति का बुनियादी अधिकार है, उसी तरह सेहत भी उसका मूलभूत अधिकार होना चाहिए. प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट अस्पतालों की लूट को बंद करने का सबसे बड़ा व आसान तरीका यही है कि जनता को रोग मुक्त रखने व करने के काम को मूलभूत अधिकार में शामिल किया जाए. इसके लिए बड़े आंदोलन व बड़ी पहल की जरूरत है. पूंजीपतियों से घिरी व पूंजीपतियों से बनी भाजपा-कांग्रेस ऐसा कोई काम नहीं करने जा रही. हाशिए पर कराहते शांत पड़े कम्युनिस्टों से फिलहाल कोई उम्मीद करना बेमानी है. ऐसे में आम आदमी पार्टी को ही हम लोग कह सकते हैं, अपील कर सकते हैं, कनवींस कर सकते हैं, समझा सकते हैं, संदेश भेज सकते हैं कि वह इस मुद्दे पर आगे बढ़े.

दुनिया के कई देशों में जनता को सेहतमंद रखने का काम स्टेट ने संभाला हुआ है. ब्रिटेन के कानूनों को माई-बाप मानकर अब तक सीने से चिपकाए रखने वाला भारत क्यों नहीं ब्रिटेन के सबके इलाज के अधिकार वाले कानून को अपने यहां बनाता, लागू करता. ध्यान रखिए. भारत जैसे देश में आज भी लोग बीमारी के इलाज में अपना सब कुछ बचत गंवा देते हैं और खेत, मकान, दुकान, गहना सब कुछ बेच देते हैं. मतलब ये कि अगर आपके जीवन में कोई दुखदायी रोग आपको ग्रहण कर ले तो आपको कंगाल होने से कोई नहीं रोक सकता. बीमारी होने पर सरकारी इलाज और सरकारी अनुदान के लाभ से गदगद कई प्रदेशों के पत्रकार भले इस मसले पर कुछ न लिखें लेकिन मेरा पहले भी कहना रहा है कि सिर्फ मंत्रियों, अफसरों, पत्रकारों को ही क्यों निःशुल्क इलाज मिले… यह काम हर किसी के लिए क्यों नहीं होना चाहिए… यह बड़ा मुद्दा है दोस्तों और हम सबके जीवन से जुड़ा हुआ है. इस पर सोचिए और इस बहस, इस बात को आगे बढ़ाइए…

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


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