‘केदारनाथ अग्रवाल : कविता का लोक आलोक’ और ‘केदारनाथ अग्रवाल : गद्य की पगडंडियाँ’ र्शीषक पुसतकें रचना और आलोचना के नए गवाक्ष खोलती हैं। रचनात्मक लेखन और आलोचना कर्म की सशक्त समझ इन दोनों पुस्तकों के संपादन कौशल में मौजूद है। इन पुस्तकों में उन सभी पहलुओं को केंद्र में रखकर लिखे गए शीर्षस्थ वरिष्ठ एवं युवा आलोचकों के आलोचनात्मक लेखों का संकलित किया गया है, जिससे केदारनाथ अग्रवाल के व्यक्तित्व एवं रचनात्मक संसार को समझने में मदद मिलती है।
उनकी कविता और गद्य के विषय में अनेक जानकारी मिलती हैं, कई ग्रंथियां खुलती हैं। पुस्तक की भूमिकाएं कई बार पढ़ने की मांग करती हैं। यहां सम्पादन कार्य की कठिन चुनौतियों से समझौता नहीं मुठभेड़ है। ये दोनों ऐसे विरल ग्रन्थ हैं जो केदार जी की कविता और उनके गद्य के प्रेमियों, शोधार्थियों एवं सामान्य पाठकों के लिए उपयोगी रहेंगे। बकौल संपादक ‘इसमें केदार जी के पैंसठ वर्ष के कवि और गद्यकार जीवन के अन्तस को समझने और उनकी रचनाधर्मिता के जनतंत्र, भाषा की सृजनशीलता और शिल्प के ठेठ सौन्दर्य को सामने रखने का विनम्र प्रयास है। हां यह अवश्य है कि इसमें संकलित लेख केदार जी को नए सिरे और नई तरह से पढ़ने का उपक्रम जरूर करायेंगे।’
संतोष भदौरिया द्वारा संपादित पुस्तक ‘केदारनाथ अग्रवाल : कविता का लोक आलोक’ में कुल तीस लेख संकलित हैं। जो सन 1965 से लेकर उनके शताब्दी वर्ष (2011) तक लिखे गए हैं। इनके चयन एवं संपादन में यह विवेक शामिल रहा है कि केदार जी की कविता के वैविध्य को सामने लाया जाए। समाज, प्रकृति और प्रेम के हर रूप सामने आए। पुस्तक में विष्णुचन्द्र शर्मा, रामविलास शर्मा, नामवर सिंह, विश्वनाथ त्रिपाठी, दूधनाथ सिंह, खगेंद्र ठाकुर, मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, नंद किशोर नवल, राजेश जोशी, विजय बहादुर सिंह, शंभुनाथ, वीरेन डंगवाल, धनंजय वर्मा, रविभूषण, राजेन्द्र कुमार, अजय तिवारी, सहित उन तमाम विद्वानों के लेखों को स्थान दिया गया है जो केदार की कविता को जग बदलने की कविता के रूप में व्याख्यायित करते हैं। उनकी कविता जनजीवन के संघर्ष को पूरी कलात्मकता के साथ प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक एक संदर्भ ग्रंथ के रूप में केदार प्रेमियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। जिसमें केदार जी की कविता का सर्वोत्तम विश्लेषण मिलेगा।
संतोष भदौरिया द्वारा संपादित दूसरी महत्वपूर्ण पुस्तक ‘केदारनाथ अग्रवाल : गद्य की पगडंडियाँ’ है, जिसमें कुल चौदह लेख और तीन साक्षात्कार शामिल हैं। हम सभी जानते हैं कि केदारनाथ अग्रवाल मूलत: कवि हैं और उन्होंने अपना सर्वोत्तम कविताओं में दिया। अब उनका गद्य, पत्र, निबन्ध उपन्यास, कहानी, यात्रा वृतान्त, नाटक और कविता संग्रह की भूमिकाओं के रूप में प्रकाशित होकर हमारे सामने है। केदार जी के गद्य को पढ़कर उनके अंर्तमन के विभिन्न प्रश्नों और सृजनात्मक बेचैनियों को बशूबी समझा जा सकता है। डॉ. रामविलास शर्मा उनके गद्य के प्रशंसक भी थे। इस पुस्तक में केदार जी के गद्यकार रूप को समझने की गंभीर कोशिश है। नामवर सिंह, परमानंद श्रीवास्तव, कान्तिकुमार जैन, आनन्द प्रकाश, रामशंकर द्विवेदी, राजेन्द्र कुमार, वीरेन्द्र यादव, विजेन्द्र, कर्मेन्दु शिशिर, वैभव सिंह, समत कई अन्य आलोचकों के महत्वपूर्ण लेख और साक्षात्कार सम्मिलित हैं। संतोष भदौरिया द्वारा संपादित दोनों ही पुस्तकें निश्चित तौर पर केदार जी के कवि और गद्यकार रूप को संपूर्णता में सामने लाने में सफल रही हैं। यह उनका अभिनव और अनूठा प्रयास है।
डॉ. बृजबाला सिंह
वाराणसी






