श्रीगंगानगर (राजस्थान)। जिले में इन दिनों टीवी रिपोर्टरों की बाढ़ सी आ गई है। ऐसे अनेक लोग हें, जो सिर्फ नाम के ही टीवी रिपोर्टर हैं। अपने आप को टीवी रिपोर्ट बताकर वे विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी कार्यक्रमों में पहुंचकर कवरेज करते हैं। जब इनसे कोई पूछता हे कि आप कौन से चैनल से हैं, तो वे ऐसे चैनलों के नाम लेते हैं, जिनका गंगानगर में प्रसारण ही नहीं होता। … और यदि प्रसारण होता भी है, तो उन पर रिपोर्ट नहीं दिखाई जाती। कुछ तथाकथित मीडिया कर्मियों की वजह से आज गंगानगर में सही मीडियाकर्मी भी बदनाम हो रहे हैं।
बिजनेस से संबंधित प्रेस कांफ्रेंसों में कैमरे लेकर पहुंचना ओर अपने आप को फलां न्यूज चैनल का रिपोर्ट बताकर अब आम बात हो गई है। राजस्थान सरकार ने मीडियाकर्मियों को रियायती दरों पर भूखंड देने की योजना चला रखी है और वर्तमान में नगर विकास न्यास की ओर से पत्रकारों के लिए दर्पण इन्कलेव कॉलोनी काट भी दी है।
हैरानी वाली बात यह है कि इस कॉलोनी में रियायती भूखंड लेने के लिए डेढ़ सौ से भी अधिक फार्म जमा हो चुके हैं, जबकि भूखंडों की संख्या 65 ही है। जिन व्यक्तियों को पत्रकारिता का क-ख-घ नहीं आता, उन्होंने भी फार्म जमा करवा दिए। कुछ तो ऐसे हैं, जिनको दर्पण कॉलोनी के कटने का पता चला, तभी कैमरा खरीद लिया और बन गए टीवी रिपोर्टर। इसका नुकसान उन लोगों को हो रहा है, जो वास्तव में पत्रकार हैं और उनकी आजीविका पत्रकारिता से ही चलती है।
खैर गंगानगर में स्थिति यह बन गई हैकि हर कोई अपने वाहनों के आगे 'प्रेस' लिखकर घूमते हैं। बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनका पत्रकारिता से कोई संबंध नहीं है, परंतु अपनी धौंस और पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए 'प्रैस' शब्द का इस्तेमाल करते हैं।
श्रीगंगानगर से जयप्रकाश मील की रिपोर्ट.






