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कैमूर जिला स्‍थापना वर्ष कार्यक्रम से दूर रखे गए इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के पत्रकार

: मीडिया पर अघोषित पाबंदी : बिहार में कैमूर जिला का स्‍थापना दिवस 17 मार्च को स्‍थानीय जगजीवन राम स्‍टेडियम में मनाया गया, परन्‍तु इससे इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के लोगों को दूर रखा गया. अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को भी बुलाने की जहमत नहीं उठाई. जिले के चार विधानसभा के ना तो विधायक बुलाए गए थे और ना ही स्‍थानीय सांसद और लोकसभा स्‍पीकर मीरा कुमार को आमंत्रित किया गया था. अधिकारियों ने टीवी मीडिया के लोगों को आयोजन से पूरी तरह दूर रखा.

: मीडिया पर अघोषित पाबंदी : बिहार में कैमूर जिला का स्‍थापना दिवस 17 मार्च को स्‍थानीय जगजीवन राम स्‍टेडियम में मनाया गया, परन्‍तु इससे इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के लोगों को दूर रखा गया. अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को भी बुलाने की जहमत नहीं उठाई. जिले के चार विधानसभा के ना तो विधायक बुलाए गए थे और ना ही स्‍थानीय सांसद और लोकसभा स्‍पीकर मीरा कुमार को आमंत्रित किया गया था. अधिकारियों ने टीवी मीडिया के लोगों को आयोजन से पूरी तरह दूर रखा.

बिहार में मीडिया पर अघोषित नियंत्रण का जीता जागता उदाहरण कैमूर जिला स्‍थापना दिवस में देखने को मिला. अधिकारी मीडियाकर्मियों से इतना खफा हैं कि जब एक सप्‍ताह पूर्व स्‍मारिका छापने के लिए डीआईडीए की अध्‍यक्षता में बैठक हुई तो उसमें भी इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े पत्रकारों को आमंत्रित नहीं किया गया था. बैठक में कहा गया कि इन्‍हें कुछ लिखने-पढ़ने नहीं आता है. उन्‍हें गधा भी बताया गया. बताया जा रहा है कि डीपीआरओ ने इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों को इसलिए निमंत्रण नहीं दिया कि वे उल्‍टी खबर चला सकते हैं.

दूसरी तरफ, अधिकारी-कर्मचारी टी शर्ट के लिए झगड़ते देखे गए. स्‍थापना दिवस मनाने के लिए राज्‍य सरकार ने तीन लाख रुपये आबंटित किए थे, लेकिन इसका उपयोग देखने को नहीं मिला. जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि इस आयोजन में अधिकारियों ने पचास हजार रुपये से भी कम राशि खर्च की है. यात्रा के दौरान भी महापुरुषों की प्रतिमाओं की साफ-सफाई नहीं की गई थी और ना ही माल्‍यार्पण किया गया था. यहां तक कि जिस जगजीवन राम स्‍टेडियम में कार्यक्रम था, उसकी ही रंगाई-पोताई कराई कई थी.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

 

 
 

 
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