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कोबरापोस्ट का स्टिंग आपरेशन सच साबित हुआ, केवल जुर्माना लगाकर आरबीआई ने बैंकों पर की मेहरबानी

लगभग दो महीने पहले अनिरुद्ध बहल और उनके वेबपोर्टल कोबरापोस्ट ने अपने स्टिंग के जरिए देश के बैंकों पर संगीन आरोप लगाए थे कि वे काले धन को सफेद करने और अवैध तरीके से पैसा ट्रांसफर करने यानि मनी लांड्रिंग का काम रहे हैं. रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) की तरफ से इसकी जांच की गई. जांच में काला धन और मनी लांड्रिंग के बारे में कहा गया है कि इनके बारे में कुछ खास पता नहीं चला लेकिन बाकी कई आरोप सच पाए गए. इन आरोपी बैंकों पर महज कुछ करोड़ का जु्र्माना लगाकर इन्हें बख्श दिया गया.

लगभग दो महीने पहले अनिरुद्ध बहल और उनके वेबपोर्टल कोबरापोस्ट ने अपने स्टिंग के जरिए देश के बैंकों पर संगीन आरोप लगाए थे कि वे काले धन को सफेद करने और अवैध तरीके से पैसा ट्रांसफर करने यानि मनी लांड्रिंग का काम रहे हैं. रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) की तरफ से इसकी जांच की गई. जांच में काला धन और मनी लांड्रिंग के बारे में कहा गया है कि इनके बारे में कुछ खास पता नहीं चला लेकिन बाकी कई आरोप सच पाए गए. इन आरोपी बैंकों पर महज कुछ करोड़ का जु्र्माना लगाकर इन्हें बख्श दिया गया.

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ), बैंक आफ बड़ौदा (बॉब), केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया (बीओआइ), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर तीन-तीन करोड़ रुपये का जुर्माना लगा है. यस बैंक, रत्‍‌नाकर बैंक, लक्ष्मी विलास बैंक, आइएनजी वैस्या, धनलक्ष्मी बैंक पर 50-50 लाख रुपये का जुर्माना लगा. सभी पर कुल मिलाकर 49.5 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोंका गया है. स्टैंडर्ड चार्टर्ड, सिटी बैंक सहित सात बैंकों को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है. करीब चार महीने पहले कोबरापोस्ट ने स्टिंग के पहले पार्ट में दिग्गज निजी बैंकों- आईसीआईसीआई, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस को निशाना बनाया था. बाद में आरबीआई ने इन तीनों बैंकों पर 10.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था.

आरबीआई की तरफ से कहा गया है कि इन बैंकों पर छह तरह के आरोप साबित हुए हैं लेकिन मनी लांड्रिंग (गैर कानूनी तरीके से धन का लेनदेन) का आरोप साबित नहीं हुआ है. वैसे, इस बारे में अभी और जांच की जा रही है. आयकर से जुड़ी एजेंसियां भी इन बैंकों के खिलाफ जांच में जुटी हुई हैं. उनकी रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम तौर पर कुछ कहा जा सकेगा. लेकिन निर्धारित सीमा से ज्यादा धन निकासी की इजाजत देने, स्वर्ण आयात नियमों का पालन नहीं करने, ग्राहकों के सत्यापन संबंधी नियमों का उल्लंघन करने के आरोप सही पाए गए हैं. साफ है कि रिजर्व बैंक नियम तो बनाता है, लेकिन उनका पालन करवाने में वह अक्षम है. यह पूरा घटनाक्रम यह भी साबित करता है कि पूरा बैंकिंग उद्योग ही आरबीआई के नियमों को ताक पर रखकर चल रहा है.

आम आदमी के पास गैर कानूनी तरीके से अर्जित आय हो तो उसे वर्षो तक कैद में रहना पड़ सकता है. लेकिन जब यही धन बैंकों के पास मिलता है तो उन पर महज 50 लाख या एक-दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाता है. रिजर्व बैंक ने देश के 22 प्रमुख बैंकों पर सोमवार को नो योर कस्टमर (केवाईसी) नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करने के आरोप में 50 लाख रुपये से तीन करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया है.

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