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कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला : देवेन्द्र दर्डा और राजेन्द्र दर्डा को पूछताछ के लिए बुलाएगी सीबीआई

नई दिल्ली। कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई अब जल्द ही एएमआर आयरन एंड स्टील प्रा. लि., नागपुर और जेएलडी यवतमाल एनर्जी लिमिटेड, नागपुर के निदेशकों को पूछताछ के लिए बुलाएगी। इन कंपनियों में दर्डा परिवार के लोग भी निदेशक थे, जिनसे पूछताछ नहीं हो पाई थी। फिलहाल, सांसद विजय दर्डा को पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जाएगा लेकिन देवेन्द्र दर्डा और राजेन्द्र दर्डा को सीबीआई पूछताछ के लिए बुलाएगी।

नई दिल्ली। कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई अब जल्द ही एएमआर आयरन एंड स्टील प्रा. लि., नागपुर और जेएलडी यवतमाल एनर्जी लिमिटेड, नागपुर के निदेशकों को पूछताछ के लिए बुलाएगी। इन कंपनियों में दर्डा परिवार के लोग भी निदेशक थे, जिनसे पूछताछ नहीं हो पाई थी। फिलहाल, सांसद विजय दर्डा को पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जाएगा लेकिन देवेन्द्र दर्डा और राजेन्द्र दर्डा को सीबीआई पूछताछ के लिए बुलाएगी।

सूत्रों के अनुसार कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने जांच के दौरान पाया कि इन दो कंपनियों जेएलडी यवतमाल प्रा.लि., नागपुर और एएमआर आयरन एंड स्ट्रील प्रा.लि., नागपुर को कोयला ब्लॉक आवंटन में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं।

दोनों कंपनियों ने कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए सरकार को आवेदन में गलत जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने जांच में पाया कि कोयला मंत्रालय ने 13 नवम्बर, 2006 को छत्तीसगढ़ स्थित फतेहपुर (ईस्ट) में कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए आवेदन मांगे थे। इस पर 53 कंपनियों ने आवेदन किए और 35 स्क्रीनिंग कमेटी ने 13 सितम्बर, 2007 को फतेहपुर कोल ब्लॉक का संयुक्त कंपनी मैसर्स जेएलडी यवतमाल एनर्जी लि., आरकेएम पावरगेन प्रा.लि., मैसर्स वीजा पावर लिमिटेड, मैसर्स ग्रीन इंफ्रास्टाक्चर प्रा.लि. और वंदना विद्युत लिमिटेड को छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में पावर प्लांट लगाने के कारण किया।

सीबीआई ने जांच में पाया कि केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने जेएलडी यवतमाल लिमिटेड सहित चार कंपनियों को कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए सिफारिश की, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने जेएलडी को कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए सिफारिश नहीं की थी। सीबीआई ने जांच में पाया कि जेएलडी यवतमाल एनर्जी लिमिटेड ने आवेदन में कई चीजें छिपाई और गलत तरीके से आवंटन के लिए आवेदन में झूठी जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार जेएलडी कंपनी ने दिखाया कि संयुक्त रूप से उसकी वित्तीय शक्ति ढाई हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है।

कंपनी को लोकमत ग्रुप और आईडीएफसी द्वारा प्रमोट किया जाता है और प्रबंधन इन्हीं के पास है। सीबीआई ने जांच में पाया कि विद्युत मंत्रालय ने प्रति मेगावाट के हिसाब से जो नियम और शत्रे रखीं थीं, उस हिसाब से जेएलडी यवतमाल कंपनी को ब्लॉक नहीं मिलना चाहिए था। इस कंपनी ने आवेदन में यह भी दिखाया था कि उसे अब तक कोयल ब्लॉक आवंटित नहीं हुआ है, जबकि 1999 और 2005 के बीच इसे पांच कोयला ब्लॉक आवंटित हुए थे। इसी प्रकार एएमआर आयरन एंड स्टील प्रा.लि. ने भी कोयला ब्लॉक पाने के लिए गलत जानकारियां आवेदन पत्र में दी थीं। सीबीआई इसके पहले अन्य निदेशकों जायसवाल बंधुओं से इस मामले में पूछताछ कर चुकी है।

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