प्रेस क्लब के सदस्य एवं दैनिक भास्कर के पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को पटियाला की एक अदालत ने शुक्रवार को प्रेस क्लब के चुनाव में मतदान करने का अधिकार प्रदान कर दिया है. प्रेस क्लब के महासचिव संदीप दीक्षित ने अभिषेक को प्रेस क्लब की सदस्यता से टर्मिनेट कर दिया था तथा इंट्री पर भी पाबंदी लगा दी थी, जिसके चलते वे चुनाव में मतदान करने के अधिकार से वंचित हो गए थे. इसके खिलाफ अभिषेक ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट ने प्रेस क्लब का 21 जनवरी को होने वाले चुनाव में मतदान करने का उनका अधिकार बहाल कर दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी.
प्रेस क्लब का सदस्य बनने की सभी औपचारिकताएं पूरी करने वाले अभिषेक उपाध्याय बीते साल अगस्त माह में मेंबर बने थे. बताया जा रहा है कि सदस्य बनने के बाद अभिषेक ने प्रेस क्लब के अंदर की अराजकता तथा एक जाति विशेष को ही महत्व देने का विरोध किया. उन्होंने प्रेस क्लब में भी एकाउंटिबिलिटी और नैतिकता का पालन करने की आवाज उठाई. इसके चलते प्रेस क्लब के महासचिव संदीप दीक्षित ने उन्हें क्लब की सदस्यता से टर्मिनेट कर दिया तथा इंट्री पर पाबंदी लगा दी. अभिषेक को उनका पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया गया. इसके बाद अभिषेक ने महासचिव संदीप दीक्षित को कई पत्र लिखकर टर्मिनेट किए जाने का कारण पूछा पर उनको प्रेस क्लब की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया.
प्रेस क्लब के गैरकानूनी तथा अवैधानिक रवैये से आहत अभिषेक ने इस मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. पटियाला हाउस में उन्होंने खुद को टर्मिनेट किए जाने का मुकदमा दायर किया. शुक्रवार को मामले की सुनवाई हुई. अधिवक्ताओं की हड़ताल के चलते कोर्ट में अभिषेक उपाध्याय एवं संदीप दीक्षित दोनों ने खुद अपनी बात रखी. दोनों पक्षों को सुनने के बाद माननीय न्यायधीश महोदय ने अभिषेक उपाध्याय की मतदान करने का अधिकार बहाल कर दिया तथा टर्मिनेशन के मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 4 फरवरी तय कर दी. कोर्ट द्वारा अभिषेक का मतदान अधिकार बहाल हो जाना संदीप दीक्षित के लिए झटका माना जा रहा है. साथ ही कोर्ट के आदेश से यह भी साबित हो गया है कि प्रेस क्लब की अराजकता के खिलाफ मुंह खोलने वालों को गैरकानूनी तरीके से बाहर करने में कोई कसर नहीं छोड़ा जा रहा है.
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