: ट्रिब्यून में प्रकाशित एक समाचार पर दिया फैसला : रोहतक। चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय में मीडिया विभाग के अध्यक्ष विरेंद्र सिंह चौहान कानूनी दायरे में उलझ गए हैं। पत्रकारिता के नियमों एवं इसका पाठ पढ़ाने वाले चौहान खुद अपनी ही पत्रकारिता के कारण फंसे हैं और एक तथ्यहीन समाचार प्रकाशित करने पर रोहतक की सिविल कोर्ट ने उन पर एक लाख रुपए का जुर्माना ठोंका है। यही नहीं विरेंद्र चौहान को यह भी आदेश दिए गए हैं कि वे इस जुर्माने की अदायगी 8 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करें।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विरेंद्र चौहान ने रोहतक में एक दैनिक समाचार पत्र में कार्य करते हुए श्री बाबा मस्तनाथ आयुर्वेदिक शिक्षण संस्थान के खिलाफ समाचार प्रकाशित किए थे। शिक्षण संस्थान के अनुसार यह समाचार आधारहीन थे और उनकी संस्था को समचार के प्रकाशनों से अपमान का घूंट पीना पड़ा था। इस पर उन्होंने रोहतक की कोर्ट में चौहान के खिलाफ मानहानि का दावा ठोंका और लाखों रुपए के हर्जाने की मांग की। विगत समय से यह मामला कोर्ट में विचाराधीन था।
इस मामले में अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए विरेंद्र चौहान को दोषी पाया और समाचार में प्रकाशित खबरों को तथ्यों से परे बताया। इस पर कोर्ट ने विरेंद्र चौहान पर एक लाख रुपए का जुर्माना ठोंका और निर्देश दिए कि वह यह राशि आठ प्रतिशत ब्याज सहित अदा करें। इस मामले में शिक्षण संस्थान के डॉ. मारकंडेय ने कहा कि इस फैसले से उन्हें काफी राहत मिली है, क्योंकि चौहान ने पत्रकारिता के नियमों को भुलाकर उनके खिलाफ समाचारों का प्रकाशन किया था। इस संदर्भ में जब विरेंद्र चौहान से पूछा गया तो उन्होंने माना कि कोर्ट ने फैसला दिया है, लेकिन वे यहां पर भी पत्रकारिता के नियमों की बात करने से पीछे नहीं हटे।
रोहतक से डीआर की रिपोर्ट.






