Sanjeev Chandan : लड़ाई का फल मुझे मिला. आज नागपुर हाई कोर्ट ने पुलिसिया कुलपति विभूति नारायण राय के मुझे गिरफ्तार करवाने के मंसूबे पर पानी फेर दिया. मेरे द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बी आर गवई और पी एन देशमुख ने विभूति के वकील को खूब हड़काया. कहा कि अपनी पर्सनल लड़ाई आप पुलिस एजेंसी के इस्तेमाल से लड़ना चाहते हैं। मैं कोर्ट रूम में मौजूद था, मुझे पिछली तारीख पर कोर्ट ने कोर्ट रूम में उपस्थित रहने के लिए कहा था.
कोर्ट ने पुलिस आफिसर को फटकार लगते हुए कहा कि जो लोग नागरिकों के मौलिक अधिकार को नहीं जानते उन्हें विभाग में रहना नहीं चहिए. जस्टिस गवई ने सरकारी वकील को भी कहा कि क्या आप अपने ऑफिसर को यह सब नहीं बताते है! दरअसल वर्धा का एसपी विभूति के साथ बिरादराना वफादारी निभा रहा था. विभूति के खिलाफ फर्जी मायग्रेशन देने के लिए वर्धा कोर्ट के आदेश से 4२० और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज है, विभूति बिना बेल के वर्धा ऑफिस में बैठे हैं, और पुलिस मुझे गिरफ्तार करने के फ़िराक में लगी थी क्योंकि विभूति ने मेरे खिलाफ भी फर्जी मायग्रेशन बना कर आंबेडकर विश्वविद्यालय में जमा करने का केस दर्ज करवा रखा है.
संजीव चंदन के फेसबुक वॉल से.






