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कोल ब्लाक के लिए नवीन जिंदल ने सवा दो करोड़ रुपये घूस तत्कालीन कोयला राज्यमंत्री नारायण राव को दिया था

नई दिल्ली : कोयला घोटाले में छोटी कंपनियों को निशाना बनाने वाली सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के बाद बड़ी मछलियों पर हाथ डाल दिया है। जिंदल औद्योगिक समूह के प्रमुख व कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल और पूर्व कोयला राज्यमंत्री दासरि नारायण राव पर जांच एजेंसी का शिकंजा कस गया है। इस मामले में सीबीआइ ने 12 वीं एफआइआर में इन दोनों नेताओं को आरोपी बनाया है।

नई दिल्ली : कोयला घोटाले में छोटी कंपनियों को निशाना बनाने वाली सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के बाद बड़ी मछलियों पर हाथ डाल दिया है। जिंदल औद्योगिक समूह के प्रमुख व कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल और पूर्व कोयला राज्यमंत्री दासरि नारायण राव पर जांच एजेंसी का शिकंजा कस गया है। इस मामले में सीबीआइ ने 12 वीं एफआइआर में इन दोनों नेताओं को आरोपी बनाया है।

इसमें जांच एजेंसी ने कहा है कि कोयला राज्यमंत्री रहते हुए नारायण राव ने जिंदल से 2.25 करोड़ रुपये की रिश्वत लेकर कोयला ब्लाक का आवंटन किया था। मंगलवार को सीबीआई ने दिल्ली स्थित नवीन जिंदल और हैदराबाद स्थित नारायण राव के घर समेत 15 स्थानों पर छापा मारा। जल्द ही इन दोनों से पूछताछ होगी।

सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नारायण राव और नवीन जिंदल के बीच रिश्वत की लेन-देन के पुख्ता सुबूत मिलने के बाद ही एफआइआर दर्ज हुई है। उनके अनुसार, एक जनवरी 2007 को जिंदल ग्रुप की दो कंपनियों जिंदल स्टील व पावर लिमिटेड और गगन स्पांज ने झारखंड के अमरकोंडा मुर्गा डांगल कोयला ब्लाक के आवंटन के लिए आवेदन किया।

कोयला ब्लाक पाने के लिए दोनों कंपनियों ने झूठे हलफनामे दिए, जिनमें जमीन और पानी की उपलब्धता को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था। इसके साथ ही कंपनी ने इसके पहले एक भी कोयला ब्लाक आवंटित नहीं होने का दावा किया, जबकि इस ग्रुप की कंपनियों को पांच कोयला ब्लाक पहले से आवंटित थे। झूठे हलफनामे के बाद जनवरी 2008 में इन दोनों कंपनियों को कोयला ब्लाक आवंटित कर दिया गया।

कोयला ब्लाक आवंटित होने के 11 महीने के बाद दिसंबर 2008 में जिंदल ग्रुप की कंपनी जिंदल रीयल्टी ने नारायण राव की कंपनी सौभाग्य मीडिया में 2.25 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। सौभाग्य मीडिया लिमिटेड का शेयर उस समय 28 रुपये में खुले बाजार में बिक रहा था, लेकिन जिंदल रीयल्टी ने इसे 100 रुपये प्रति शेयर की दर पर खरीदा। सीबीआइ का मानना है कि यह रिश्वत की रकम थी, जो जिंदल की ओर से नारायण राव को दी गई थी। वैसे रिश्वत देने में जिंदल ने पूरी सावधानी बरती थी।

रिश्वत की रकम पहले गगन स्पांज से उन्हीं के ग्रुप की कंपनी न्यू दिल्ली एक्जीम के माध्यम से होते हुए जिंदल रीयल्टी में गई थी। सीबीआई ने इन सभी कंपनियों के ठिकानों की तलाशी ली है। नवीन जिंदल के देश के बाहर होने के कारण दिल्ली स्थित उनके घर के कई आलमारियों को सीबीआई ने सील कर दिया है। इनकी चाभी खुद जिंदल के पास है। उनके लौटने के बाद इनकी तलाशी ली जाएगी। इस बीच, जिंदल ग्रुप ने इस मामले की जांच में सीबीआइ को सहयोग का भरोसा दिया। (जागरण)

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