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क्या तहलका वाले भी अब फ्रेंचाइजी बांटने के कारोबार में उतर पड़े हैं!

: कानाफूसी : चर्चा है कि देश में जनसरोकारी पत्रकारिता के लिए जानी जाने वाली पत्रिका 'तहलका' ने छत्तीसगढ़ में एक प्राइवेट फ्रेंचायजी खोली है. सूत्र बताते हैं कि विगत दिनों रायपुर शहर के रजवंधा मैदान स्थित प्रेस कॉम्पलेक्स में स्थित समवेत शिखर की इमारत में पिंक मीडिया एंड इनफोटेनमेंट प्रा. लिमिटेड के नाम से एक कार्यालय भी खोला जा चुका है. प्राप्त जानकारी अनुसार यह फ्रेंचायजी कांगेर वेली स्कूल वालों ने 50 लाख रुपए सिक्योरिटी देकर हासिल की है.

: कानाफूसी : चर्चा है कि देश में जनसरोकारी पत्रकारिता के लिए जानी जाने वाली पत्रिका 'तहलका' ने छत्तीसगढ़ में एक प्राइवेट फ्रेंचायजी खोली है. सूत्र बताते हैं कि विगत दिनों रायपुर शहर के रजवंधा मैदान स्थित प्रेस कॉम्पलेक्स में स्थित समवेत शिखर की इमारत में पिंक मीडिया एंड इनफोटेनमेंट प्रा. लिमिटेड के नाम से एक कार्यालय भी खोला जा चुका है. प्राप्त जानकारी अनुसार यह फ्रेंचायजी कांगेर वेली स्कूल वालों ने 50 लाख रुपए सिक्योरिटी देकर हासिल की है.

साथ ही नेपथ्य के पीछे किसी नीरज मिश्रा का नाम सामने आया है जो कि कांग्रेस नेता एवं राज्य समाज कल्याण बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष के सुपुत्र है. श्री मिश्रा पूव में भी इंडिया टुडे को फ्रेंचायजी के माध्यम से संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं जो कि बाद में बंद करनी पड़ी थी.

लगातार पिछले ढाई सालों से तहलका हिन्दी के साथ रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सोनी लिख रहे हैं. उन्होंने राज्य सरकार की गलत नीतियों एवं घोषित योजनाओं के क्रियान्यवयन में लगातार कमी को उजागर कर अपनी कलम से लोहा मनवाया है. अब इस प्रकार से फ्रेंचायजी के माध्यम से छत्तीसगढ़ में तहलका की हलचल मीडिया से जुड़े लोगों में कौतुहल का कारण बनी हुई है. चचाएं आम हैं कि क्या तहलका ने आगामी चुनाव के मद्देनजर कोई मार्केटिंग स्ट्रेट्जी इजात की है या फिर लगातार राजकुमार सोनी द्वारा राज्य की भाजपा सरकार व विपक्षी दल कांग्रेस के खिलाफ लिखी जा रही स्टोरियों को दबाने का प्रयास है.
जो भी हो, प्रदेश में फ्रेंचायजी के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर के जनसत्ता ने भी प्रवेश किया था लेकिन उसका भी भविष्य सिफर रहा और वर्तमान में पॉयनियर भी कोई खास अंजाम तक नहीं पहुंच पा रहा है, ऐसे में तहलका जैसे विश्वसनीय ब्रांड का इस प्रकार से करवट बदलना कई सवाल खड़े करता है. अब पत्रकार सोनी पर क्या तहलका कोई एडजेस्ट करने का दबाव बनाएगा या फिर सोनी खुद ही कोई दूसरा रास्ता इख्तियार करेंगे, ये देखना काफी रोचक होगा.

रायपुर से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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