लखनऊ से किन्हीं सज्जन ने भड़ास के पास एक तस्वीर मेल किया है. साथ ही अपनी टिप्पणी भी. तस्वीर है नदीम और अखिलेश के गर्मजोशी से मिलने की. टिप्पणी ये है-
''यूपी के सीएम को इतनी गर्मजोशी से किसी से मिलते देखा है कभी आपने? नहीं न, यहां वह नवभारत टाइम्स के लखनऊ संस्करण की औपचारिक शुरुआत करते वक्त एसिस्टेट एडीटर नदीम से मिलते हुए। (यह फोटो नदीम जी के फेसबुक पर बने फोटो एलबम से हमने लिया है।) लाख टके का सवाल यह है कि सीएम इतनी मजबूती और आत्मीयता से नदीम को पकड़ कर क्या कह रहे हैं? चर्चा तो यह है कि सीएम ने नदीम को दैनिक जागरण छोड़ने की बधाई दी। (अगर ऐसा न हो तो नदीम जी खुद ही बता दें कि सीएम ने उन्हें पकड़कर क्या कहा था।) इन दोनों के बीच में खड़े टाइम्स प्रबंधतंत्र के एक अधिकारी ने भी इसे अपनी जीत मानी और खूब जोर से हंस दिए। सीएम से नजदीकी रिश्ता न बना पाने की वजह से पहले स्वदेश कुमार को हटा चुके और अब परवेज अहमद के सिर पर तलवार लटकाए जागरण प्रबंध तंत्र को सोचना होगा कि आखिर वजह क्या है कि सीएम दैनिक जागरण से इतना चिढ़ते हैं?''

अब आप खुद बताइए, इस तस्वीर को देखकर कोई 'राजनीतिक' अर्थ निकाला जा सकता है या एक अखबार के शुरुआत के मौके पर आए मुख्यमंत्री अखिलेश द्वारा परिचित पत्रकारों से आत्मीयता से मिलना भर है! वैसे, पत्रकारों के बारे में कहा जाता है कि इनके बीच आपसी राजनीति नेताओं की आपसी राजनीति से भी ज्यादा तेज व बड़ी होती है. इसलिए कौन किसके बारे में कब क्या कह बता लिख सुना पढ़ भेज दे, कुछ नहीं कहा जा सकता.






