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दिल्ली

क्यों चुनाव प्रक्रिया से हटे एडवोकेट पीयूष जैन?

कड़कडड़ूमा कोर्ट का जाना-माना नाम एडवोकेट पीयूष जैन ने अचानक चुनाव से दो दिन पहले घोषणा की कि वह चुनाव प्रक्रिया से हट रहे हैं। श्री जैन इस कोर्ट में ज्वाइंट सेक्रेटरी पद के उम्मीदवार थे। उनके शांत और हंसमुख स्वभाव के कायल उनके खिलाफ चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवार और उनके समर्थक भी हैं।

कड़कडड़ूमा कोर्ट का जाना-माना नाम एडवोकेट पीयूष जैन ने अचानक चुनाव से दो दिन पहले घोषणा की कि वह चुनाव प्रक्रिया से हट रहे हैं। श्री जैन इस कोर्ट में ज्वाइंट सेक्रेटरी पद के उम्मीदवार थे। उनके शांत और हंसमुख स्वभाव के कायल उनके खिलाफ चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवार और उनके समर्थक भी हैं।

इस बाबत जब हमने पीयूष जैन से बात की तो उनका कहना था कि कोर्ट में 1 अक्टूबर को चुनाव इसलिए रोक दिया गया कि चुनाव समिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा पर बेईमानी कराने का आरोप लगाया जा रहा था। उस दिन कोर्ट में देर रात तक अंधेरा होता रहा। श्री शर्मा को हटा कर नया चुनाव समिति अध्यक्ष नियुक्त करने के लिए 3 अक्टूबर को एक जी.बी.एम. बुलाई गई। उस जी.बी.एम. में हंगामा और मारपीट हुई और कोई फैसला नहीं हुआ। इसके बाद उससे अगले दिन सभी उम्मीदवारों की एक मीटिंग दोबारा शाम पांच बजे कॉमन हॉल में बुलाई गई। वहां पर विचार हुआ कि यदि सुरेन्द्र शर्मा को चुनाव समिति के चेयरमैन पद से हटाते हैं तो दोबारा चुनाव कराना पड़ेगा।

ऐसे में कुछ उम्मीदवार कम निवेशकों को लगा कि यदि ऐसा हुआ तो उन्हें दोबारा से लाखों रुपये चुनाव में दोबारा झोंकने पड़ेंगे। ऐसे में श्री शर्मा को ही चुनाव समिति का चेयरमैन रहने देते हैं। हैरानी की बात यह है कि वह निवेशक ही सबसे ज्यादा श्री शर्मा को हटाने की मांग कर रहे थे। अब अचानक जब उन्हें अपना फाइनेंशियल लॉस दिखा तो वह उसी चेयरमैन के अंर्तगत चुनाव लडऩे के लिए तैयार हो गए। इस सारे अध्याय से शाहदरा बार की प्रतिष्ठा सारे वकील समुदाय में घटी है। मेरा मानना है कि यदि मैं दोबारा चुनाव उसी चेयरमैन के तहत लडूं तो यह खुद के साथ बेईमानी होगी। ऐसे में दोबारा वोट डालने का कोई औचित्य नहीं था। जो वोट डले थे, उनकी ही गिनती की जा सकती थी। करीब 50 फीसदी वोट पड़ ही चुके थे। मैं इस तरह की गड़बडिय़ों का शुरू से ही विरोधी रहा हूं। यदि मैं चुनाव प्रक्रिया से नहीं हटता तो मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाता। लिहाजा मैने कीचड़ के खेल से खुद को अलग कर लिया।

इसे भी पढ़ें…

कृपया मुझे वोट न दें : पीयूष जैन एडवोकेट

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