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क्रांति किशोर मिश्र की मौत खराब खून चढ़ाने से हुई, दुर्घटना से नहीं

लखनऊ के तेजतर्रार पत्रकार और सुदर्शन न्यूज के ब्यूरो चीफ क्रांति किशोर मिश्र की मौत एक्सीडेंट की वजह से नहीं बल्कि खराब खून चढ़ाने की वजह से हुई. उन्हें जब दुर्घटना के बाद बरेली लाया गया तो डाक्टरों ने उनकी हालत को खतरे से बाहर बताया. उनके कूल्हे का आपरेशन होना था. वो हुआ. बाद में क्रांति किशोर मिश्र के शरीर में जब खून की कमी महसूस हुई तो उन्हें बाहर का जो खून चढ़ाया गया वह खराब था.

लखनऊ के तेजतर्रार पत्रकार और सुदर्शन न्यूज के ब्यूरो चीफ क्रांति किशोर मिश्र की मौत एक्सीडेंट की वजह से नहीं बल्कि खराब खून चढ़ाने की वजह से हुई. उन्हें जब दुर्घटना के बाद बरेली लाया गया तो डाक्टरों ने उनकी हालत को खतरे से बाहर बताया. उनके कूल्हे का आपरेशन होना था. वो हुआ. बाद में क्रांति किशोर मिश्र के शरीर में जब खून की कमी महसूस हुई तो उन्हें बाहर का जो खून चढ़ाया गया वह खराब था.

इसी खराब खून के चढ़ाने से क्रांति किशोर की तबीयत बिगड़ने लगी और उनकी हालत बेहद खराब हो गई. तब उन्हें आनन-फानन में बरेली से दिल्ली भेजा गया. उन्हें दिल्ली में अपोलो में भर्ती कराया गया. लेकिन डाक्टर उन्हें बचा नहीं सके. क्रांति किशोर मिश्र के छोटे भाई रजत मिश्र अब भी अपोलो में भर्ती हैं. अपोलो के डाक्टरों की रिपोर्ट में यह साफ कहा गया है कि क्रांति किशोर मिश्र की मौत खराब खून चढ़ाने से हुई है. इस खराब खून के इनफेक्शन से उनकी हालत बिगड़ी और उन्हें बचाया नहीं जा सका. कहा जा सकता है कि बरेली के डाक्टरों की लापरवाही के तेजतर्रार पत्रकार के जान जाने का कारण बना.

क्रांति किशोर मिश्र

क्रांति किशोर मिश्र

उधर, बरेली में पुलिस ने खून बेचने वालों की धरपकड़ शुरू की है. बरेली से प्रकाशित दैनिक जागरण अखबार की खबर के मुताबिक क्राइम ब्रांच ने डेढ़ माह पहले अलग-अलग जगहों पर छापा मारकर जो खून बरामद किया था, उसके एक नमूने की रिपोर्ट एचआइवी पॉजिटिव निकली है. इससे प्रशासन से लेकर पुलिस तक हड़कंप मच गया है. ब्लड बैंकों की नये सिरे से जांच का फैसला हुआ है. पुलिस भी हरकत में आई है. खून के सौदागरों पर प्रभावी शिकंजा कसे जाने की तैयारी है.

करीब डेढ़ महीने पहले क्राइम ब्रांच ने अलग-अलग जगह छापेमारी करके छह लोगों को गिरफ्तार किया था. इनके पास से ब्लड के पैकेट बरामद हुए थे. पकड़े गए युवक तो बरामद ब्लड को ब्लड बैंक का बता रहे थे. लेकिन पुलिस ने इसे सच न मानते हुए इसके नमूने लिए थे.

प्रयोगशाला से खून के आठों नमूनों की रिपोर्ट तीन दिन पहले आ गई. जांच में आठों नमूने फेल हो गए. खून को मानव शरीर में चढ़ने योग्य नहीं पाया गया था. औषधि प्रशासन विभाग ने खून की रिपोर्ट तफ्तीश करने वाली बारादरी पुलिस को भेज दी, जो विवेचना अधिकारी रवींद्र कुमार को भी मिल गई है. उसमें एक रिपोर्ट एचआइवी पॉजिटिव मिली है. तब इस संबंध में औषधि निरीक्षक एके चोपड़ा से बात की गई. रिपोर्ट को फिर से देखने के बाद उन्होंने भी स्वीकार किया कि एक नमूने की रिपोर्ट एचआइवी पॉजिटिव है. मामला अफसरों के संज्ञान में लाया गया. तय हुआ है कि ब्लड बैंकों की जांच फिर से की जाएगी. पुलिस मौत के सौदागरों पर शिकंजा कसने के लिए सक्रिय हुई है.

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