राहुल देव : हिन्दी टीवी समाचारों के सुधार, विकास और परिष्कार के लिए अनिवार्य है कि उनकी गहरी, समझदार, सहानुभूतिपूर्ण लेकिन वस्तुपरक समीक्षा हो। उसे वे गंभीरता से लें। मुकेश कुमार, विनीत कुमार, अभिषेक जैसे कुछ नाम तो जानता हूं जो गंभीर चिंतन और लेखन कर रहे हैं मीडिया पर लेकिन बड़े फलक की विचारधारात्मक बहसों और आलोचनाओं के साथ साथ हर हफ्ते हिन्दी समाचार चैनलों के कामकाज पर नज़र, विश्लेषण, उनके तकनीकी, व्यावहारिक, व्यावसायिक पक्षों, एंकरों-संवाददाताओं की शैली, भाषा, प्रस्तुतिकरण वगैरह पर जानकारीपूर्ण चर्चा की जाए।
मैं बहुत हिन्दी अखबार, पत्रिकाएं नहीं देख पाता। क्या मित्र बताएंगे कि कहां कहां, कौन कौन लोग अच्छी समीक्षाएं लिख रहे हैं? हिन्दी के कई पोर्टल हैं मीडिया पर ही केन्द्रित। पत्रकारों की आवाजाही, विवादों के साथ साथ क्या वे अच्छा हिन्दी मीडिया विमर्श भी बढ़ा रहे हैं? प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में पढ़ाने वाले विद्वान, शिक्षक, पूर्व-पत्रकार इस काम के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त हैं। पर यह कितना कर रहे हैं वे?
वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव के एफबी वॉल से साभार.






