पश्चिम बंगाल में चिट फंड घोटाले का पर्दाफाश होने और निवेशकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले सारदा समूह के अध्यक्ष सुदीप्तो सेन के साथ कथित संबंधों की वजह से राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस भारी राजनीतिक दबाव का सामना कर रही है। इस धोखाधड़ी का मुख्य आरोपी सेन इस समय पुलिस की गिरफ्त में है और उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है। इस बीच उन्होंने संवाददाताओं से कहा है कि जांच पूरी होने के बाद सबकुछ सामने आ जाएगा।
अदालत परिसर में पत्रकारों द्वारा इस घोटाले में राजनेताओं की संलिप्तता के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'जांच पूरी होने दीजिए। बहुत जल्द सब कुछ सामने आ जाएगा।' इसके पहले सरकारी वकील ने जांच की प्रगति के बारे में अदालत को बताया कि ऐसे कई लोग हैं जो आधिकारिक तौर पर सारदा समूह का हिस्सा नहीं थे लेकिन उन्हें समूह की ओर से मेहनताना दिया जाता था। अदालत ने जांच का काम आगे बढ़ाने के लिए सेन की पुलिस हिरासत की अवधि अगले 9 दिनों के लिए बढ़ा दी है। सेन के साथ-साथ उनकी करीबी सहयोगी देवयानी मुखर्जी के अलावा झारखंड में समूह का कामकाज देखने वाले अरविंद सिंह चौहान भी शामिल हैं जिनकी पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ाई गई है। 14 दिन की पुलिस हिरासत की अवधि खत्म होने के बाद इन सभी को विधाननगर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ए एच एम रहमान की अदालत में आज पेश किया गया था। बिधाननगर पुलिस इस मामले की तहकीकात कर रही है। पुलिस ने जांच का काम आगे बढ़ाने के लिए अदालत से उनकी पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ाने की मांग की थी।
इस मामले के मुख्य जांच कर्ता और डिटेक्टिव विभाग के उपायुक्त अर्णव घोष ने कहा, 'इस सिलसिले में हमें उनसे बहुत अहम जानकारी मिली है। जांच अभी जारी है।' हालांकि उन्होंने जांच के बारे में आगे कुछ भी खुलासा करने से इनकार कर दिया। गिरफ्तारी से पहले सीबीआई को लिखे पत्र में सेन ने आरोप लगाया था कि तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद कुणाल बोस और सृंजय बोस की ओर से उन्हें लगातार ब्लैकमेल किया जाता था और उन्हें मोटी धनराशि भुगतान करने के लिए भी मजबूर किया गया था। हालांकि दोनों नेताओं ने सेन के इस तरह के आरोपों का खंडन किया था। दूसरी तरफ, राज्य के प्रमुख विपक्षी वाम दल और कांग्रेस का आरोप है कि सेन का संबंध सत्तारूढ़ दल के नेताओं से रहा है और इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
सीबीआई जांच की मांग : इस बीच सूर्यकांत मिश्रा के नेतृत्व में माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम से मुलाकात कर चिट फंड घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। इस प्रतिनिधिमंडल में माकपा के सीताराम येचुरी, वासुदेव आचार्य, सूर्यकांत मिश्र, आसीम मनोहर, भाकपा के प्रबोध पांडा और आरएसपी के मनोहर तिरकी शामिल थे। यह प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मिलेगा। वाम दल लंबे समय से मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि राज्य की ममता बनर्जी सरकार ऐसी जांच का विरोध इसलिए कर रही है क्योंकि इससे उनकी पार्टी और चिट फंड घोटाले में शामिल सारदा समूह और अन्य से उसके कथित रिश्तों की पोल खुल जाएगी। (बीएस)






