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क्‍यों नहीं बजेगा एनएनआईएस का बैंड, जब ”आदरनीय” हिंदी प्रभारी ऐसे हैं

वरिष्ठ पत्रकार उदय चंद्र सिंह के इस्तीफे के बाद एनएनआईएस की हिन्दी सेवा दम तोड़ने के कगार पर है। श्री सिंह के इस्तीफे के एक हफ्ते बाद ही एनएनआईएस को हिन्दी अखबारों के लिए शुरू की गई अपनी टेक्स सेवा बंद करनी पड़ी। प्रबंधन ने अखबारों को यह लिखा कि वो इस सेवा को नये तेवर के साथ लॉन्च करेंगे, लेकिन जो लोग पत्रकारिता से जुड़े हैं वो रीलॉन्च के नाम पर किसी सेवा को बंद करने का मतलब अच्‍छी तरह जानते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार उदय चंद्र सिंह के इस्तीफे के बाद एनएनआईएस की हिन्दी सेवा दम तोड़ने के कगार पर है। श्री सिंह के इस्तीफे के एक हफ्ते बाद ही एनएनआईएस को हिन्दी अखबारों के लिए शुरू की गई अपनी टेक्स सेवा बंद करनी पड़ी। प्रबंधन ने अखबारों को यह लिखा कि वो इस सेवा को नये तेवर के साथ लॉन्च करेंगे, लेकिन जो लोग पत्रकारिता से जुड़े हैं वो रीलॉन्च के नाम पर किसी सेवा को बंद करने का मतलब अच्‍छी तरह जानते हैं।

दरअसल, हिन्दी सेवा अगर लड़खड़ा रही है तो उसके लिए प्रबंधन की अदूरदर्शी नीति जिम्मेदार है। श्री सिंह के इस्तीफे के बाद अगर एनएनआईएस में किसी को फायदा हुआ तो वो हैं चंदन कुमार चमन। एक साल पहले तक साधना में बतौर प्रोड्यूसर चंदन कुमार चमन ने उदय चंद्रा के इस्तीफे के बाद प्रबंधन पर दबाब बनाने के लिए यह हवा उड़ा दी कि उसे साधना में पचास हजार रुपये का ऑफर है। उन्होंने एनएनआईएस प्रबंधन के आगे भी यही बातें रखी और अपना इस्तीफा भेज दिया। दरअसल, उन्हें पक्का भरोसा था कि वो अपने पुराने बॉस उदय चंद्रा के साथ निकल लेंगे, लेकिन उदय चंद्रा ने पहले ही साफ कर दिया था कि अरुप घोष के साथ अपने पुराने संबंधों के कारण वो एनएनआईएस के किसी शख्स को अपने नये प्रोजेक्ट में नहीं जोड़ेंगे।

परन्‍तु चंदन एनएनआईएस प्रबंधन को साधने में सफल रहे और प्रबंधन ने उन्हें हिन्दी सेवा की कमान सौंप दी और प्रबंधन यहीं गलती कर बैठा। जिस शख्स को हिन्दी सेवा की कमान थमाई गई उऩ्हें  “आदरणीय” शब्द तक नहीं लिखना आता। इसकी मिसाल के तौर पर उनका एक पत्र आप नीचे देख सकते हैं। ये वो शब्द हैं जो कक्षा तीन में बच्चों को पत्र कैसे लिखें के क्रम में सिखाया जाता है। लेकिन अरुप के ''आदरनीय'' प्रभारी ने शायद ये नहीं पढ़ा होगा। एनएनआईएस की टेक्स्ट सेवा के अलावा क्षेत्रीय चैनलों को दी जा रही विजुअल सेवा की हालत भी खस्ता है। खबरें देर से जा रही हैं। कारण वही है कि रिपोर्टरों को काम के बदले पैसा समय से नहीं दिया जा रहा है। एनएनआईएस की सेवा ले रहे टीवी चैनल अब नया विकल्प तलाश रहे हैं। नीचे 'हिंदी प्रभारी' का मेल..


From: Arup Ghosh <[email protected]>
Date: 2013/4/22
Subject: Re: personal
To: chandan kumar chaman <[email protected]>

Chandan,

It was always a pleasure working with you. Maybe you don’t know but your entry here was because I wanted you in nnis. This is when a senior had said no.

I say this as I shall feel your absence.
We wish you well and hope you find what you did not get here.
Warmly.
Arup

On 22/04/13 9:55 AM, "chandan kumar chaman" <[email protected]> wrote:

    आदरनीय अरूप सर,

    इस अविश्वास भरे माहौल में भी आपने मुझपर भरोसा किया और इतना बड़ा ऑफर दिया, ये आपकी महानता है । इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। लेकिन अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धताओं और मजबूरी के कारण मैं आपका ऑफर स्वीकार करने की स्थिति में नहीं हूं ।  इसके लिए मैं आपसे माफी चाहता हूं ।  

    धन्यवाद।

    चन्दन कुमार चमन
    प्रोड्यूसर, एनएनआईएस हिन्दी

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