एक वरिष्ठ पत्रकार ने एक होटल समूह के अधिग्रहण से एक गांव को बचाने में कथित रूप से नाकाम रहने पर सरकार की निंदा करते हुए गोवा पत्रकार संघ जीयूजे के उन्हें दिया गया पुरस्कार वापस लौटा दिया. गोवा के मराठी अखबार ‘गोवा दूत’ में प्रधान संवाददाता के तौर पर कार्यरत किशोर नाइक गांवकर ने पेरनम तालुक का पूरा तेरेखोल गांव एक होटल समूह को कथित रूप से बेचने की योजना का खुलासा किया था. होटल समूह वहां सबसे पहले एक गोल्फ कोर्स शुरू करने वाला था.
गांवकर को सर्वश्रेष्ठ खोजी खबर के लिए वर्ष 2011-12 का चर्चित ‘लैंबर्ट मैस्कारेनहास पुरस्कार’ मिला था. नाइक ने कहा, ‘‘मेरी खबरों की श्रृंखला गांववालों के जाहिर की गई मजबूरी पर आधारित थी. दुर्भाग्य से राज्य सरकार ने गांववालों के नजरिये पर ध्यान नहीं दिया’’. राज्य के पत्रकारों का सबसे पुराना संगठन जीयूजे पिछले एक दशक से हर साल यह पुरस्कार देता है.
उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि विधानसभा के वर्तमान सत्र के दौरान राज्य सरकार के पांच अप्रैल 2013 को सदन के पटल पर रखे गये तारांकित प्रश्न के जरिये सरकार ने कहा कि एक होटल समूह को इस गांव में गोल्फ कोर्स का निर्माण करने की अनुमति दी गई है’’ हालांकि पत्रकार ने स्पष्ट किया कि उनकी इस मुद्दे पर कोई राय नहीं कि गोल्फ कोर्स के निर्माण का सरकार का फैसला वैध है या अवैध.
नाइक ने जीयूजे के अध्यक्ष पांडुरंग गांवकर को संबोधित करते हुए लिखे अपने पत्र में कहा, ‘‘लेकिन मैं पुरस्कार लौटा रहा हूं क्योंकि मेरी जिस खबर के लिए मुझे पुरस्कार मिला, वह गांववालों को न्याय नहीं दिला सकी. मुझे बस यह लगता है कि जिस खबर पर सरकार का ध्यान जाए उसे पुरस्कृत किया जाना चाहिए’’. गांवकर ने कहा कि संगठन की कार्यकारी समिति इस मुद्दे पर चर्चा करेगी. उन्होंने कहा कि समिति के सदस्यों के साथ चर्चा के बाद ही हम इस पर कुछ टिप्पणी करेंगे. (सहारा)






