आगरा के प्रतिष्ठित दयालबाग शिक्षण संस्थान (डीईआई) में शुक्रवार शाम एक शोध छात्रा की निर्मम हत्या कर दी गयी। छात्रा की लाश कैम्पस से ही लैब के भीतर मिली। घटना काफी बड़ी है, दुर्भाग्यपूर्ण है और साथ ही साथ शिक्षण संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े करती है। इस खबर को अखबार में प्रकाशित करते समय जहाँ अधिकाँश समाचार पत्रों ने संयम व जिम्मेदारी का परिचय दिया वहीं दूसरी ओर महिला सशक्तिकरण-महिला सुरक्षा को लेकर अभियान चला रहे दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ ने इस खबर को और अधिक सनसनीखेज बनाने के लिए ऐसे तथ्य भी छाप दिए जिनकी पुष्टि तक नहीं हुयी।
शनिवार को हिन्दुस्तान ने इस खबर को प्रथम पृष्ठ पर “डीईआई लैब में रेप, हत्या” शीर्षक के साथ छापा। हत्या की पुष्टि तो हो चुकी थी लेकिन रेप की खबर इन्होंने अपनी खबर में और मसाला डालने के लिए जोड़ दी। शनिवार को डॉक्टरों के एक पैनल ने छात्रा का पोस्टमार्टम किया, जिसमें अभी तक तो छात्रा के साथ दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। इस खबर को आज (रविवार को) हिन्दुस्तान ने “छात्रा की हत्या के शोक में उबला शहर” शीर्षक के साथ फिर प्रकाशित किया, जिसमें ऊपर स्वयं इन्होंने भी लिखा ‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं, जाँच को स्लाइड सुरक्षित रखी’। ऐसे में प्रश्न केवल यही है कि जब तक किसी तथ्य की पुष्टि नहीं हो जाती तब तक उसे इस तरह प्रकाशित करने से क्या लाभ? अन्य अखबारों ने भी इस खबर को छापा था लेकिन उन्होंने लिखा था कि ‘रेप का अंदेशा’ किन्तु हिन्दुस्तान ने तो अपनी ओर से ही रेप की पुष्टि करती हुयी खबर प्रकाशित कर दी, जो कि सरासर गलत है।

शायद ये खुद को औरों से आगे रखने और एक्सक्लूसिव खबर देने के दवाब का ही नतीजा है, जो जल्दबाजी में कुछ भी छाप दिया जाता है। रेप हुआ या नहीं ये तय करना डॉक्टरों के पैनल का काम है, उनकी जिम्मेदारी है- आप क्यूँ पहले से ही अपनी ओर से इस बात का दावा करने लगे। ठीक है, युवती की लाश जिस अवस्था में मिली उससे इस प्रकार का एक अंदेशा सभी जता रहे थे तो अगर आपको भी छापना था तो छाप देते कि “हत्या से पहले रेप का अंदेशा”। लेकिन जो कुछ इन्होंने छापा उससे तो शहर की शान्ति एवँ क़ानून व्यवस्था भी बिगड़ सकती थी, वो तो गनीमत है कि सड़क पर उतरे सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन यदि कोई अनहोनी हो जाती तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ का एक नियमित पाठक होने के नाते इस तरह के गैरजिम्मेदाराना रवैये के साथ ख़बरों के प्रकाशन की मैं घोर निंदा करता हूँ, आलोचना करता हूँ। ख़बरें छापिए लेकिन जिम्मेदारी के साथ…..मसाला ख़बरें नहीं बल्कि वो ख़बरें जो सच हैं-जनसरोकार की हैं।
शिवम भारद्वाज
आगरा






