भड़ास4मीडिया में जिस किसी ने व्यक्तिगत नाम को दर्शाते हुए अवैध वसूली में हजारीबाग के चार मीडियाकर्मियों की पिटाई नामक खबर भेजने का दुस्साहस किया है वो पहले अपने गिरेबान में झांककर देखे। दूसरी बात किसी ने सच ही कहा है की जिसके घर शीशे के होते हैं वो दूसरों के घर में पत्थर नहीं फेंका करते। साथ ही बगैर सच्चाई जाने खबर भेजने वाला एक बार तो सोच लेता, क्या शरम-हया सब मर चुका था?
जिस किसी ने लिखा है मेरे भाई उसे मैं ये बता देना चाहता हूं कि पत्रकारिता हमें नहीं बल्कि उन्हें नहीं करनी चाहिए थी। साथ ही फेसबुक प़र मैसेज पास कर अपने आप को यदि यह दर्शाने का प्रयास कर रहा होगा तो जान लो बउवा जिस कालेज में अभी तुम दाखिला लिए हो, मैं आज से एक दशक पूर्व इसका प्रिंसपल रह चुका हूं। तुम जैसे ओछे सोच वाले लोग पत्रकारिता को कलंकित करते हो। वक्त है अभी भी सुधर जाओ। जिले के सुरमा पत्रकार सुबोध बाबू आईडी किसके हाथ में होनी चाहिए इसका सर्टिफिकेट आप से नहीं चाहिए।
रामानंद पाण्डेय
महुआ न्यूज






