Priyankar Paliwal : छौंक या बघार या तड़का लगाने के पंचफोड़न में राई, जीरा, मेथी, सौंफ और कलौंजी शामिल हैं. आपके घर की रसोई में अब इनमें से कितनों का उपयोग होता है? एक बेचार जीरा भर जैसे-तैसे अस्तित्व बचाए है. बाकी सब प्याज-लहसुन के पेस्ट की भेंट चढ़ गए. जलते अंगारे पर घी के साथ हींग या लौंग की धुंआर तो छोड़ ही दें. जब कहता हूं कि आपने अपनी खान-पान की पारंपरिक विविधता का मटर-पनीरीकरण और प्याज-लहसुनीकरण कर दिया है तो आप बुरा मानते हैं .
Bodhi Sattva मेरी रसोईं में तो सब हैं, बल्कि जेत पत्ता, लौंग, कालीमिर्च, बड़ी इलायची, हल्दी, छोटी इलायची, हर्रे, धनिया, सोंठ, अजवाइन, मुलेठी, अदरक, हींग, तुलसी पावडर और कुछ अन्य किसी न किसी रूप में बड़ी मात्रा में रहते हैं।
Mohan Shrotriya अपन के घर में ये पांचों हैं. हींग भी है. साबुत और घर का पिसा गरम मसाला भी.
Bodhi Sattva अमचुर, शहद, कोहड़ौरी और कई और तत्व रखे हैं।
Nishant Mishra मेरे घर तो सभी का प्रयोग होता है. खड़ा गरम मसाला भी खरीदा जाता है और ज़रूरत के वक्त उसमें से भी चीजें निकाल कर प्रयोग में लेते हैं. घर में बुकनू अभी भी बनता है. कलौंजी सिर्फ मठरी, पपड़ी में ही डलती है.
वंदना शर्मा अपने यहाँ तो ये सारे सतत उपस्थित रहते हैं ..रायते का सरसों तेल हींग और करसी वाला बघार भी
Masijeevi Hindi पारंपरिक रसोई भयानक जेंडर्ड स्पेस थी इसलिए डीजेंडर्ड या कम से कम कम जेंडर्ड होने के लिए पेस्ट/पाउडर मॉडल आता है। अब भी किसी के पास केवल रसोई झोंकने के लिए स्त्रियॉं हों तो वह इस पर ऑंसू बहाए या गर्व करे… हमें तो मेथी सौंफ की बेड़ी मुक्त इंसानों के साथ रहना ही अब स्वाभाविक जान पड़ता है।
Bodhi Sattva गन्ने के रस से बनाया सिरका, देशी गुड़, मिश्री, सब है सर जी।
वंदना शर्मा ऊपर मित्रों के कमेंट इसका सबूत हैं कि लहसुनिकरण के प्रवर्तक रसोइये एक आप ही हैं
Priyankar Paliwal Bodhi Sattva : वाह तब तो पंसारी की पूरी दुकान है . आनंद की बात है . इनसे खाना ही जायकेदार नहीं बनता,बहुत-सी व्याधियों का घरेलू उपचार भी होता रहता है .
Bodhi Sattva मैंने अपनी चाय के लिए 8 तत्वों के साथ जायफल मिला कर एक अलग बूटी बनाई है। वो संजीवनी है मेरे लिए। आप कहें तो सत्व चाय चूर्ण करके सप्लाई करूँ आपको।
Santosh Kr. Pandey पंचफोरन , इमली , जावित्री , बड़ी इलायची , केसर , अमचूर , काली और पीली राई आदि जमकर प्रयोग मैं जापान में करता हूँ ! बस फ़र्क़ सिर्फ इतना है कि इन्हे लेने के लिए दो महीने में एक बार मुझे ४०-५० किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है क्यूंकि इसके लिए ख़ास दूकान दूरी पर है !
Priyankar Paliwal मैं सोच ही रहा था कि अब तक जेंडर वाला मामला नहीं उठा, कि मसिजीवी आ गए. अब हमारे प्यारे मित्र बोधिसत्व पक्के अत्याचारी ठहरेंगे क्योंकि इनके रसोईघर की इतनी विविधता के पीछे नारी-उत्पीड़न न हो यह संभव नहीं.
Priyankar Paliwal बोधि भाई, नेकी और पूछ-पूछ !
Bodhi Sattva इन मसालों में हम दोनों की सहभागिता है। चाय का मामला पूरा मेरा है। पंचफोड़न आभा का। बाकी के मामले सर्दी जुकाम से जुड़े हैं। मुझे तेज पत्ता बेहद पसंद है तो मैं अलग से लेकर आता हूँ। मुलेठी अपना गला साफ रखने के लिए खुद खोजा है। शहद को केले के साथ बचपन से खाता आया हूँ तो वह इसलिए है।
Bodhi Sattva Masijeevi Hindi जी पारंपरिक रसोई भयानक जेंडर्ड स्पेस थी नहीं अभी भी है।
Bodhi Sattva Priyankar Paliwal भाई आने वाला हूँ तो लेकर आऊँगा।
Arun Arora Bade bade bhide hai ….hamari chhoti badi harad ko kon sunega …
Neeraj Diwan कतई नहीं। मैं हर तरह के मसालों का यथोचित उपयोग करता हूं। निजी रूचि है। इतने मसाले हैं अपने डिब्बे में।
Priyankar Paliwal रसोई 'जेंडर्ड स्पेस' न हो इसकी कोशिश होनी चाहिए पर रसोई उनकी कहीं ज्यादा 'जेंडर्ड स्पेस' है, 'जिनके पास' स्त्रियां रसोई के अलावा नौकरी के भाड़ में झौंकने के लिए भी हैं . वहां पेस्ट-पाउडर उसका मामूली मुआवजा भर है, मुक्ति का परवाना नहीं. वैसे भी ऐसी दो आमदनी वाली रसोई में स्त्री की स्थानापन्न भी स्त्री ही होती है, पुरुष नहीं. स्त्रियों पर दोहरी मार का लाभार्थी और आधुनिक/क्रांतिकारी एक साथ होना विचित्र स्थिति है.
वंदना शर्मा रसोई की बातें चल ही निकलीं तो जरा मीठा भी हो जाए – डाक्टर -तुम्हारे दांत कैसे टूट गये
आदमी -जी वो बीवी ने कड़क रोटी बनाई थी
डाक्टर -तो खाने से इनकार कर देते
आदमी -जी वो ही तो किया था
Masijeevi Hindi बेशक रसोई एक जेंडर्ड स्पेस है। इसकी उनकी सबकी रसोई। कामकाजी स्त्री जाहिर है दोनों ओर से पिसती है वह न पिसे या कम पिसे इसकी कोशिश होनी ही चाहिए। पिसे मसाले, पेस्ट, मिक्सी और जाहिर है पति का रसोई में साथ जीवन को कुछ आसान बनाते होंगे। वैसे इन आसान बनाने वाले तत्वों पर उन स्त्रियों का भी पूरा हक है जो कामकाजी नहीं हैं।
Bodhi Sattva वंदना शर्मा दी पति की पिटाई मिठाई कैसे है। हमें इस तरह के मीठे से पतियों को दूर रखना होगा।
Priyankar Paliwal हां ! हक तो है . इनको और उनको दोनों को . बशर्ते उनके साथ बिंधा पुरुष-प्रजाति का साथी इसे संभव होने दे . पर हर बात को अत्याचार के तराजू पर तौलने का पैमाना भी शुरुआती उपयोगिता के बाद बहुत दूर तक काम करता प्रतीत नहीं होता .See Translation
Arun Arora ये मसालों से महिला चर्चा पर कब और कैसे उतर आये ..? ….. राम राम राम …..हम तो तेजपाल के दर से यहाँ तेजपत्ता तक का जिक्र नहीं कर रहे थे और ये सब …….हमारे जैसे धार्मिक आदमी के लिए ये जगह ठीक नहीं भाई, जो चिकन मटन भी बिना प्याज लहसुन के खाता हो …..खिसकते है जी …
Priyankar Paliwal अरुण जी, आपसे भिन्न स्थिति है मेरी . मैं बिना चिकन-मटन के प्याज-लहसुन खाता हूं .
Arun Arora भाई जी वास्तव में मैं केवल प्याज ही खा पाता हूँ. लहसुन डाक्टर की राय के बावजूद नहीं खा पाता … उसकी सुगंध मुझ से सहन नहीं होती …
Priyankar Paliwal उस 'सुगंध' की वजह से ही गरीब आदमी लहसुन खा पा रहा है. लहसुन के औषधीय गुणों को देखते हुए अगर दुर्गंध न होती तो उसकी कीमत सोने से ज्यादा होती. यह गंध तत्व उसे हमारी-आपकी पहुंच में बनाए हुए है.
Prathak Batohi बहुत बढ़िया सर, रात की रोटी दूध में तोडकर व् बसिया भात को ताज़ी तरकारी के साथ नाश्ते में लेने वाले लोग अन पुरखे हो गये है । हाँ आज ही इस परम्परा या शुद्धतावाद को घर में लागू करवाने की अपील करूंगा।
Sagar Nahar प्याज, लहसुन-अदरक पेस्ट और कलौंजी हमारी रसोई में नहीं है। बाकी सारे मसाले हैं, कोयले और घी का धुंआर भी!
Arun Arora ये बात आपकी बिलकुल सही है , में हृदय रोग की दवाईया खा रहा हूँ रक्त दबाव कम करना ,खून पतला करना अब मेरे लिए प्रतिदिन का कार्य हो गया है , में जानता हूँ लहसुन अब मेरे लिए अमृत सरीखी औषधी है , मेरी रक्त वाहिनियो में जमी कोलेस्ट्रोल की परते अब यही उधेड़ सकता है ….. लेकिन मित्र में इसकी ये सुगंध सहन करना बहुत मुश्किल है शायद ,, मेचाह कर भी नहीं कर पा रहा हूँ .. मैंने इसके कैप्सूल खाने की कोशिश की लेकिन मुझे दिन भर उबकाईया आती रही .. सो बहुत कठिन है जी
प्रियंकर पालीवाल के फेसबुक वॉल से.






