Vikas Mishra : वो दावा करते हैं कि आदमी को बस दो मिनट में पहचान जाते हैं, सच ये है कि आज तक खुद को ही पहचान नहीं पाए। वो चेलों और चमचों से घिरे रहते हैं, दूसरों की जासूसी करवाते हैं और दावा करते हैं कि तमाम लोग उनके मित्र हैं। वो हर मित्र से फायदा उठाना चाहते हैं, उसके पद, पोजीशन, रसूख का और कहते हैं कि निःस्वार्थ दोस्ती करते हैं। खुद को बहुत बड़ा स्वाभिमानी जताते हैं, लेकिन थूककर चाटते उन्हें कई बार देखा है।
अगर कोई उनका जानने वाला मुसीबत में है तो पहले ये ढूंढते हैं कि उसने कहीं मेरी शान में कभी कोई गुस्ताखी तो नहीं की थी, अगर खुदा न खास्ता कोई छोटी सी बात मिल गई तो उसे अपमानित करते हैं। तुर्रा ये कि खुद को बहुत बड़ा उदार जताते हैं। अपनी इज्जत उन्हें बहुत प्यारी है, लेकिन दूसरों की इज्जत उछालने के मौके ढूंढते रहते हैं। खुद परेशान रहते हैं इस फेर में कि दूसरों को परेशान कैसे करें। गिनती के लोग उनकी इज्जत करते हैं, लेकिन वो उन्हें भी खोने पर आमादा रहते हैं।…. आपके आसपास भी ऐसे लोग होंगे, मेरे भी हैं, जिन्होंने किश्तों में दिल दुखाया है।
आजतक न्यूज चैनल में कार्यरत विकास मिश्रा के फेसबुक वॉल से.






