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खुर्शीद भाई, जिस चैनल पर आपकी मान मर्यादा का बलात्कार किया जा रहा था, उसी चैनल के एक रिपोर्टर को…

Vikas Mishra : खुर्शीद भाई ठीक नहीं किया। सारा मजा किरकिरा कर दिया। अभी तो आपके नाम पर तमाम नारीवादी भद्र लोग बलात्कार की चॉकलेट चुभला रहे थे, उसका खट्टा मीठा रस अभी भीतर तक घुला नहीं पाए थे। अभी तमाम भेड़िए भेड़ की खाल ओढ़कर तुम्हें कोसते। नौ सौ चूहे खाकर हज की तरफ प्रस्थान करती 'बिल्लियां' तुम्हें वासना का पुजारी, हवस का दरिंदा ठहरातीं।

Vikas Mishra : खुर्शीद भाई ठीक नहीं किया। सारा मजा किरकिरा कर दिया। अभी तो आपके नाम पर तमाम नारीवादी भद्र लोग बलात्कार की चॉकलेट चुभला रहे थे, उसका खट्टा मीठा रस अभी भीतर तक घुला नहीं पाए थे। अभी तमाम भेड़िए भेड़ की खाल ओढ़कर तुम्हें कोसते। नौ सौ चूहे खाकर हज की तरफ प्रस्थान करती 'बिल्लियां' तुम्हें वासना का पुजारी, हवस का दरिंदा ठहरातीं।

और वो…चैनल वाले भाई साहब अभी आपको सरेआम फांसी पर लटकाने का फरमान भी कहां दे पाए थे। दारू पीकर टुन्न हुई भोली भालियां अभी भरपेट तुम्हें गरिया भी नहीं पाई थीं। सारा मजा किरकिरा कर दिया। अरे मरना था तो मर जाते… लेकिन जाते जाते मजा तो दे जाते। अब देखो वही कहावत हुई- मुर्गे की जान गई, खाने वालों को स्वाद भी नहीं आया।

क्या खुर्शीद भाई, थोड़ी और जलालत झेल जाते तो आपका क्या चला जाता, मरना तो वैसे भी था तुम्हें। तमाम चैनल वाले मिलकर आपका ट्रायल कर डालते, आपको फांसी चढ़वा देते। साबित नहीं हो पाता तो क्या, आपकी इज्जत इतनी उछाल देते कि आप क्या, आप जैसा कोई भी गैरतमंद इंसान शर्म से मर जाता। लेकिन भाई इतनी जल्दी क्यों की। अब देखो नारीवादी बेचारे बीच सड़क पर खड़े कुत्ते की तरह हो गए हैं, किधर जाएं। जिसको कोस कोसकर अपना खाना पचाते, वो तो इंसाफ के लिए खुदा की दर की तरफ निकल लिया, अब क्या करें। बचीं वो सती-सावित्री, उनको क्या कहें, क्या न कहें। अब वो फेसबुक पर नारीवाद का झंडा फहराने वाले बड़े भाई साहब के मुंह पर भी ताला जड़ गया। जो कल तक तुम्हारा तमाशा देखना चाहते थे, वो अब तुम्हारे नाम पर स्यापा कर रहे हैं। सबको कसक है कि खेल बीच में छोड़कर चले गए खुर्शीद भाई।

खुर्शीद भाई अफसोस रहेगा कि आप बदलते भारत की नई तस्वीर बिना देखे चले गए। अभी तो तमाम कानूनों का खेल देखना बाकी था। अभी आपने देखा नहीं कि कैसे पांच-छह साल बाद अचानक मोहतरमाओं को याद आ रहा है कि 'उन्होंने' 'उसके' साथ जो किया था, वो बलात्कार था। कानून है, पुलिस है, मुकदमा लिखो। उसे उस जुर्म की सजा दिलाओ, जो उसे याद भी नहीं होगा कि उसने किया कब था।

खुर्शीद भाई जिस चैनल पर आपकी मान मर्यादा का बलात्कार किया जा रहा था, उसी चैनल के एक रिपोर्टर को यौन शोषण के आरोप में एक मोहतरमा रिपोर्टर ने अंदर करवा दिया था। अरसे से उसके साथ उसी के घर में रह रही थीं। वो क्या नाम है आजकल के फैशन का–हां लिव इन में। अचानक याद आया कि यार वो मजा नहीं है, शोषण है। फिर क्या… करवा दिया उसे अंदर। वो रिपोर्टर माशा अल्लाह जिंदा है अभी। तो आपको ही कौन सी जल्दी पड़ी थी। रुक जाते, पब्लिक को पूरा मजा करा देते। किनकी बातों पर आकर आपने इतना बड़ा फैसला ले लिया। अरे अगर उनमें इतना ही दम होता तो कोई तो खड़ा होकर कहता कि खुर्शीद अनवर गलत थे, इसी वजह से खुदकुशी कर ली।

खुर्शीद अनवर….। मैं आपको जानता नहीं था, आपसे कभी मिला नहीं था। आप मरकर तमाम सवाल अधूरे छोड़ गए। आपको श्रद्धांजलि नहीं दे रहा हूं। अफसोस तो ये है कि आप अपना और पूरा सच अपने साथ लेकर चले गए।

(एक्टिविस्ट खुर्शीद अनवर के नाम..जो अपना चरित्र हनन सहन नहीं कर पाए और आत्महत्या कर ली)

आजतक न्यूज चैनल में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्रा के फेसबुक वॉल से.

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