यूपी के सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज में प्रकृति की मार से बेबस किसानों के दर्द को समझने वाला कोई नहीं है। नदी कटान के चलते करीब ग्यारह सौ बीघा खेत चले जाने और उसका हल प्रशासन व जनप्रतिनिधि द्वारा न निकाले जाने से गुस्साए ग्रामीणों ने इस बार के चुनाव में नेताओं के लिए नो इंट्री का बोर्ड लगा रखा है, साथ ही वोट न डालने का फैसला भी कर लिया है। मामला डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम असनहरा माफी का है। करीब डेढ़ हजार की आबादी वाले इस गांव में आधी आबादी दलितों की है।
इसमें दो दर्जन से अधिक लोगों को पट्टा भी दिया गया। लोग उस पर कब्जा कर खेती का कार्य करते थे। 1998 में नदी की कटान इतनी बढ़ गई कि पट्टे की जमीन के साथ पुस्तैनी जमीन भी नदी दूसरे पार चली गई। लोग नाव व कच्चे पुल से पार होकर खेती करने जाते रहे मगर 19 जून 2011 से कुछ दबंग व्यक्तियों ने उस पर अपना अधिकार जताने लगे। प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के यहां बार-बार दौड़ने के बाद भी कोई हल नहीं निकला। फलत: जैसे ही विधान सभा 2012 का एलान हुआ, ग्रामीणों ने विरोध का अपना अलग तरीका अपना लिया। गांव के बाहर बैनर टांग दिया जिसमें नेताओं व समर्थकों का प्रवेश वर्जित कर दिया तथा वोट न डालने का भी निर्णय लिया गया। बैनर के नीचे बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा रहकर नारे भी लगाते हैं कि खेत नहीं तो वोट नहीं।
ग्रामीणों में अलाउद्दीन, अबरार, अनवारुद्दीन, दाताराम व दलित बिरादरी के रंगीले, नेबूलाल, विफई, रामदीन, सुंदर, लखन आदि दर्जनों लोगों का कहना है कि एक ही झटके में खेतिहर किसान भूमिहीन हो गए बावजूद कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इसलिए उन्होंने मतदान न करने और नेताओं को गांव में न घुसने का फैसला किया है। एसडीएम श्याम कुमार भट्ट ने बताया कि आज ही जानकारी मिली है, पता करवाते हैं कि क्या मामला है जो भी संभव कार्यवाही होगी, की जायेगी।
साभार : दैनिक जागरण






