जालंधर में टीवी पत्रकारों द्वारा गठित की गयी संस्था 'पंजाब इलेक्ट्रोनिक मीडिया एसोसिएशन' उर्फ 'पेमा' अपने गठन से पहले ही विवाद के घेरे में है. ए2जेड चैनल के रिपोर्टर पवन धूपर ने संस्था के चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि संस्था के चुनाव में वह लोग वोट डाल गए जो आधिकारिक रूप से किसी चैनल के प्रतिनिधि नहीं हैं जबकि उनके पास चैनल की रिपोर्टिंग का आधिकारिक लैटर होने के बावजूद उन्हें वोट का अधिकार नहीं दिया गया.
पवन के आरोप में इसलिए भी दम है क्योंकि बाइस रिपोर्टरों की इस संस्था में परमजीत रंगपुरी एक वोट से चुनाव जीते. रंगपुरी को ग्यारह वोट मिले जबकि प्रतिद्वन्दी अश्वनी मल्होत्रा को दस वोट मिले. एक वोटर इतना शातिर निकला कि उसने वोट करने का ढोंग तो किया लेकिन अपना वोट नहीं डाला. जिस पर नतीजा रंगपुरी के पक्ष में चला गया. पवन जालंधर में टीवी मीडिया में पिछले आठ साल से सक्रिय हैं और स्थानीय हलचल चैनल के इलावा एसवन के लिए भी रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
पवन का आरोप है कि जी न्यूज के रिपोर्टर के साथ कैमरामैन के रूप में काम करने वाले पावन कनोजिया को वोटिंग का अधिकार दिया जा सकता है तो उन्हें वोटिंग के अधिकार से वंचित क्यों रखा गया. पवन कनोजिया आधिकारिक रूप से किसी चैनल का रिपोर्टर नहीं है. पवन ने कई बार पत्रकारों से वोटिंग राइट के लिए गुहार लगायी लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी. चुनाव के बाद सारे पत्रकार उस शातिर रिपोर्टर की चर्चा करते रहे जिसने चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने का ढोंग तो किया लेकिन वोट नहीं डाला. चुनाव प्रक्रिया गोपनीय होने के कारण उस रिपोर्टर का नाम नहीं पता चल सका लेकिन पवन द्वारा उठाए गए सवाल से इस पूरी चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.





