गाजीपुर मे गंगा मे आई बाढ़ का कहर लगातार जारी है। पिछले दो दिनों से खतरे के निशान के ऊपर बह रही गंगा के जल स्तर मे लगातार वृद्धि जारी है। 2 सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रही गंगा ने शहर के निचले क्षेत्रों मे बसे मुहल्लों समेत जिले के विभिन्न तटीय गांवों को अपनी जद मे ले लिया है। गंगा मे बाढ़ की वजह से जिले के कई तटवर्ती इलाकों मे आफत टूट पड़ी है। कहीं गांव पानी से घिर गये हैं तो कहीं संपर्क मार्गों के डूबने से आवागमन बंद हो गया है। जिले मे पिछले पांच दिनों से गंगा लगातार उफान पर है। जिले के मुहम्मदाबाद क्षेत्र के सेमरा,शिवराय का पुरा,करंडा क्षेत्र के कालनपुर जबकि जमानियां क्षेत्र के सरैया, डुहियां, बहलोलपुर के साथ साथ सैदपुर क्षेत्र के आधा दर्जन गांव गंगा मे आयी बाढ़ के पानी से घिर गये है।
शहर के ददरीघाट,कलेक्टर घाट,गोराबाजार क्षेत्र के निचले इलाके मे बसे मुहल्लों मे भी लोगों के घरों मे बाढ़ का पानी घुसना शुरु हो गया है। प्रदेश सरकार मे कैबिनेट मंत्री कैलाश यादव के गांव जैतपुरा की निषाद बस्ती भी गंगा की बाढ़ की चपेट मे आ गई है। गाजीपुर मे गंगा मे खतरे का निशान 63.105 मीटर पर है,जबकि इस समय गंगा का पानी 64 मीटर पर बह रहा है।जिले मे गंगा के जल स्तर मे लगातार वृद्धि के चलते गोमती,कर्मनाशा,बेसों,मंगई मे भी बाढ़ आ गई है।बाढ़ के बढ़ते खतरे से तटीय इलाकों के बाशिंदे सहमे नजर आ रहें है। जिले के दर्जनों गांवों मे बाढ़ का पानी आ जाने से लोगों को भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जिले मे सैकड़ों एकड़ खेती गंगा मे डूब गई है,जबकि सैकड़ों घर बाढ़ के पानी से घिर गये है। ऐसे मे बाढ़ की आफत का सामना कर रहे लोग अपना सामान समेट कर सुरक्षित जगहों पर जाने को मजबूर है। इतना ही नही बाढ़ के चलते लोगो के सामने मवेशियों के चारे का संकट बना हुआ है। जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ के मद्देनजर राहत एवं बचाव कार्य के कारगर कदम कहीं नजर नही आ रहें है। ऐसे मे नाव के सहारे सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर रहें ग्रामीणों के बीच रोष भी व्याप्त है। —गाजीपुर से के.के.की रिपोर्ट





