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गैंगस्टर प्रकरण में थानेदार है जिम्मेदार, अंधेरे में रखा एसएसपी को!

: चल रही है दुबारा जांच : दोषी थानेदार पर कार्रवाई संभव : चचेरे भाई का नाम गैंगस्टर से हटना संभव : यशवंत जी, आपके चचेरे भाई रविकांत सिंह पर गैंगस्टर लगाए जाने वाले प्रकरण से मैं पूरी तरह परिचित हूं. मैं आपके गाजीपुर जिले का एक पत्रकार हूं. अपना नाम यहां नहीं देना चाहता इसलिए अनुरोध है कि मेल आईडी आदि का प्रकाशन नहीं करेंगे. बताना चाहूंगा कि गैंगस्टर लगाने की जो प्रक्रिया होती है उसमे सबसे बड़ा रोल थानेदार का होता है.

: चल रही है दुबारा जांच : दोषी थानेदार पर कार्रवाई संभव : चचेरे भाई का नाम गैंगस्टर से हटना संभव : यशवंत जी, आपके चचेरे भाई रविकांत सिंह पर गैंगस्टर लगाए जाने वाले प्रकरण से मैं पूरी तरह परिचित हूं. मैं आपके गाजीपुर जिले का एक पत्रकार हूं. अपना नाम यहां नहीं देना चाहता इसलिए अनुरोध है कि मेल आईडी आदि का प्रकाशन नहीं करेंगे. बताना चाहूंगा कि गैंगस्टर लगाने की जो प्रक्रिया होती है उसमे सबसे बड़ा रोल थानेदार का होता है.

नंदगंज थाने के थानेदार हरेराम मौर्य पर बसपा नेता उमाशंकर कुशवाहा का दबाव था कि वह आपके चचेरे भाई पर गैंगस्टर लगाए. यह दबाव किसने कैसे कब बनाया, यह दूसरी कहानी है लेकिन मजेदार बात ये है कि थानेदार हरेराम मौर्य आखिर बसपा नेता उमाशंकर कुशवाहा के कहने पर तुरंत आंख मूंद कर क्यों एक्शन ले लेता है. बताना चाहूंगा कि जब एल. रवि कुमार गाजीपुर के एसएसपी थे तो उमाशंकर कुशवाहा ने ही हरेराम मौर्य को थाने की पोस्टिंग दिलाई. मतलब ये कि थानेदार की कुर्सी दिलाते रहने में उमाशंकर कुशवाहा का रोल रहा है जिसके कारण हरेराम मौर्य उनके इशारे पर गलत से गलत काम करने से नहीं चूकते.

थानेदार जब गैंगस्टर के लिए फाइल तैयार करता है तो वह अपनी तरफ से किसी के बारे में ऐसा लिख सकता है कि जिससे लगे कि अगर इस व्यक्ति को जेल में नहीं डाला गया तो वह बाहर अशांति फैला देगा. थानेदार के इनपुट पर ही एसएसपी आदि काम करते हैं. थानेदार हरेराम मौर्य ने जो फाइल तैयार की उस पर एसएसपी डा. मनोज कुमार ने हस्ताक्षर कर दिए. लेकिन गैंगस्टर की प्रक्रिया में यह प्रावधान है कि हस्ताक्षर होने के बाद एक बार फिर जांच थाने के पास जाती है जिसमें दरोगा जांच कर गैंगस्टर के लिए नामजद व्यक्ति के अतीत वर्तमान को खंगाल कर फिर रिपोर्ट देता है और रिपोर्ट में बताता है कि यह शख्स गैंगस्टर लगाने के लिए कितना जेनुइन है या नहीं है.

अगर कोई निर्दोष कभी गैंगस्टर की चपेट में आ जाता है तो दूसरी जांच के जरिए नाम बाहर भी निकाल दिया जाता है. दूसरी जांच वाली प्रक्रिया आपके चचेरे भाई वाले मामले में चल रही है. संभव है, डा. मनोज कुमार तक निर्दोष पर गैंगस्टर लगाने का यह मुद्दा पहुंचा है तो वे अपने लेवल पर भी छानबीन जांच कराएं और निर्दोष पाए जाने पर आपके चचेरे भाई का नाम गैंगस्टर से निकलवा दें. लेकिन यह सब करने होने में थोड़ा वक्त लग सकता है. उम्मीद करिए कि दोषी थानेदार दंडित होगा और निर्दोष रविकांत गैंगस्टर की चपेट में आने से बच सकेगा. पर यह सब जब तक हो, तब तक आप लोगों को, मीडिया के साथियों को धैर्य रखना चाहिए.

जिस तरह थानेदार ने गेहं के साथ घुन पिसने वाले अंदाज में अन्य आरोपियों पर गैंगस्टर लगाने के साथ साथ आपके निर्दोष चचेरे भाई पर भी गैंगस्टर लगा डाला, उसी तरह आप लोग भी इस गल्ती के लिए थानेदार के साथ साथ एसएसपी को भी दोषी ठहरा रहे हैं जो एक तरह से अन्याय है. एसएसपी डा. मनोज कुमार न्यायप्रिय और जेनुइन इंसान हैं. वह गलत सही में भेद करना अच्छी तरह जानते हैं. लेकिन जब नीचे का स्टाफ उन तक सही रिपोर्ट नहीं पहुंचाएगा तो वे कर भी क्या सकते हैं. जिस तरह का सिस्टम पुलिस विभाग में है, उसमें उपर बैठा अधिकारी नीचे के हालात के बारे में अपने अधीनस्थों के इनपुट से ही अपडेट रह पाता है.

ऐसे में यह गुंजाइश रहती है कि कोई अधीनस्थ गलत इनपुट देकर बॉस को कुछ समय के लिए बहका ले लेकिन यह सब देर तक नहीं हो सकता. डा. मनोज कुमार के संज्ञान में आपके निर्दोष चचेरे भाई रविकांत सिंह पर गैंगस्टर लगाए जाने का मुद्दा आ चुका है. वह जरूर उचित निर्णय और एक्शन लेंगे. उम्मीद करते हैं कि तब तक के लिए आप लोग किसी निर्दोष अफसर को आरोपी बनाने-मानने जैसी कोई बात नहीं कहेंगे.

-गाजीपुर से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित


निर्दोष युवक रविकांत सिंह को गैंगस्टर में निरुद्ध किए जाने के प्रकरण को लेकर प्रकाशित अन्य खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, क्लिक करते ही कई शीर्षक आएंगे जिन पर एक एक कर क्लिक करते हुए सभी खबरें पढ़ सकते हैं-

गाजीपुर में पुलिस की मनमानी, निर्दोष युवक पर लगाया गैंगस्टर

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