: सीएम ने कहा- प्रशासन ने नहीं लगाया था प्रतिबंध : श्रीनगर : मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वादी में अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के बाद अखबारों के प्रकाशन और बिक्री पर किसी तरह की पाबंदी से इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो किसी स्थानीय अखबार का ऑनलाइन संस्करण भी जारी नहीं होता। इस बीच अफजल के फांसी के बाद बुधवार को पहली बार पाठकों के पास अखबार पहुंचा। अफजल गुरु को फांसी के बाद वादी में हालात को काबू रखने के लिए प्रशासन ने शनिवार की रात से ही श्रीनगर में प्रकाशित होने वाले सभी अखबारों को कथित तौर पर बंद करा दिया था।
प्रशासन कुछ छपे अखबारों को जब्त भी करा लिया था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि यहां किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न ना हो सके। स्थिति के लगभग सामान्य हो जाने और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया तक यह मामला पहुंच जाने के बाद प्रशासन ने मंगलवार की शाम स्थानीय अखबारों के प्रकाशन पर लगी अनाधिकृत रोक को हटा लिया। बुधवार को कई स्थानीय अखबार सुबह पाठकों के हाथ में पहुंचे। इन अखबारों का प्रकाशन शनिवार से ही बंद था।
इधर, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला जो शनिवार को गुरु को फांसी के बाद से ही ट्विटर पर सक्रिय नहीं थे, वे भी बुधवार को यहां उपस्थित हुए तथा अखबारों पर लगाए गए प्रतिबंध को मनगढ़ंत बताया। उन्होंने ट्विटर पर कहा कि सरकार ने अखबारों पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं लगाया था। अखबार मालिकों और संपादकों ने खुद ही अखबारों का प्रकाशन बंद करने का फैसला किया था, क्योंकि उनका मानना था कि कर्फ्यू के चलते वह अखबार बांट नहीं पाएंगे। उमर ने कहा कि अगर सरकार ने प्रतिबंध ही लगाना होता तो वह अखबारों के ऑनलाइन संस्करण पर भी लगाती। लेकिन किसी भी अखबार का ऑनलाइन संस्करण प्रभावित नहीं हुआ है।






