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चपरासी से रिपोर्टर बने शख्स ने दलाली का इतिहास रचा

देश के एक बड़े अखबार की एक यूनिट में एक चपरासी के रिपोर्टर बनने का सफ़र काफी घिनौना है. चपरासी का रिपोर्टर बनना अच्छी बात है लेकिन यह बंदा जिस सोच व मानसिकता से काम कर रहा है, वह काफी घिनौना है. यह चपरासी लगभग 4 साल पहले तक यूनिट के ही एक कार्यालय में स्टाफ के लोगों को पानी और चाय पिलाता था. एक पूर्व संपादक की सनक ने इससे चपरासी की जगह रिपोर्टर का काम लेना शुरू कर दिया.

देश के एक बड़े अखबार की एक यूनिट में एक चपरासी के रिपोर्टर बनने का सफ़र काफी घिनौना है. चपरासी का रिपोर्टर बनना अच्छी बात है लेकिन यह बंदा जिस सोच व मानसिकता से काम कर रहा है, वह काफी घिनौना है. यह चपरासी लगभग 4 साल पहले तक यूनिट के ही एक कार्यालय में स्टाफ के लोगों को पानी और चाय पिलाता था. एक पूर्व संपादक की सनक ने इससे चपरासी की जगह रिपोर्टर का काम लेना शुरू कर दिया.

उसके जाने के बाद नए संपादक की चपरासीगिरी करके यह कागजों में भी रिपोर्टर बन गया. इसी के बाद इसने दलाली और ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू कर दिया. पत्रकारिता की आड़ में इसने जमकर दलाली और ब्लैकमेलिंग की और लाखों रुपये कमा डाले. यहाँ तक कि अपने भाइयों और रिश्तेदारों को ठेकेदार बना डाला. आज शहर में इसका लाखों रुपए का एक फ्लैट और दूसरी जमीनें हैं. इसकी बदली जीवनशैली का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि कभी एक एक दाने को मोहताज यह चपरासी आज 3-4 हजार रूपए के जूते पहनता है.

अपनी कमाई का एक हिस्सा यह ऑफिस के कुछ पुराने साथियों को भी पहुंचाहता है. बदले में साथी लोग इसकी खबरों को सही करके अच्छे पन्ने पर छापने की जिम्मेदारी लेते हैं. बीते दिनों जब इसकी बीट बदली गई तो ऑफिस की एक लाबी भड़क गई थी. रिपोर्टर भी छुट्टी बीच में छोड़कर वापस भाग आया था. लेकिन संपादक नहीं माना. पूरे शहर में ये रिपोर्टर नहीं बल्कि दलाल के रूप में पहचाना जाता है.

सब इसकी काली कमाई का रास्ता भी जानते हैं लेकिन अखबार में फिर भी सालों से जमा है. इसकी वजह से अखबार भी बदनामी झेल रहा है. अभी भी घाघ टाइप के पुराने लोगों के चलते कमाई वाली बीट मिली हुई है. इसने पहले डाक्टरों के बीच में अखबार को दलाल के रूप में बदनामी दिलाई अब सांसद और बन विभाग के अधिकारियों में लुटिया डुबो रहा है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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