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सुख-दुख...

चप्पल फेंक कर मारने वाली महिला पत्रकार

कलकत्ता से प्रकाशित अंग्रेज़ी दैनिक टेलीग्राफ के दिल्ली ब्यूरो के प्रमुख शेखर भाटिया थे. वह अखबार के राजेन्द्र नगर गेस्ट हाउस में कभी-कभी बैठक बुलाकर समस्याओं को दूर करते, साथ साथ खाना भी खाते रहते. एक दिन एक महिला पत्रकार तवलीन सिंह ने गुस्से में आकर न जाने किस कारण उन्हें मारने के लिए चप्पल फेंका. इतने में एक पत्रकार उठे जिनका नाम जगमीत उप्पल था. जगमीत उप्पल ने वह चप्पल उठाकर एक प्लेट में रखा और शेखर भाटिया के सामने रख दिया और कहा कि सर यह आपके लिए तवलीन सिंह का तोहफा है.

कलकत्ता से प्रकाशित अंग्रेज़ी दैनिक टेलीग्राफ के दिल्ली ब्यूरो के प्रमुख शेखर भाटिया थे. वह अखबार के राजेन्द्र नगर गेस्ट हाउस में कभी-कभी बैठक बुलाकर समस्याओं को दूर करते, साथ साथ खाना भी खाते रहते. एक दिन एक महिला पत्रकार तवलीन सिंह ने गुस्से में आकर न जाने किस कारण उन्हें मारने के लिए चप्पल फेंका. इतने में एक पत्रकार उठे जिनका नाम जगमीत उप्पल था. जगमीत उप्पल ने वह चप्पल उठाकर एक प्लेट में रखा और शेखर भाटिया के सामने रख दिया और कहा कि सर यह आपके लिए तवलीन सिंह का तोहफा है.

अभी यह प्रक्रिया चल ही रही थी कि तब तक दूसरा चप्पल आ गया. वह भी उन्हें नहीं लगा. जगमीत उप्पल ने उसे भी प्लेट में रख कर कहा ,'सर आपके लिए.'  एक दिन पत्रकार तवलीन सिंह ने दफ्तर का टाइप राइटर उठाकर दूसरे पत्रकार के ऊपर फेंक दिया था. परन्तु वह उन्हें लगा नहीं. उस पत्रकार ने उस दिन आईएनएस बिल्डिंग के अपने आफिस से भाग कर अपनी जान बचाई थी. नेहरू जी के घरेलू नौकर उमाशंकर दीक्षित की पुत्रवधू शीला दीक्षित उन्नाव से चुनाव लड़ना चाहती थीं. परन्तु उन्नाव से हथकरघा मंत्री जेडआर अंसारी सांसद थे. उसी सरकार में राजीव गांधी के परिवार के एक अन्य सदस्य अरुण नेहरू भी मंत्री थे.

आजकल तो शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं. अरुण नेहरू ने शीला दीक्षित को उन्नाव से टिकट दिलाने की एक नई तरकीब निकाली. अरुण नेहरू की एक महिला परिचित थी. उस परिचित की बेटी मुक्ति दत्ता एक एनजीओ चलाती थी. एक साजिश के तहत अरुण नेहरू और मुक्ति दत्ता की माँ ने मुक्ति दत्ता को केंद्रीय मंत्री जेडआर अंसारी के पास भेजा. मंत्री के पास से जैसे ही मुक्ति दत्ता बाहर आई उसने शोर मचाना शुरू कर दिया कि मंत्री मेरे साथ बलात्कार करना चाहता था. जब इस पर हो हल्ला मचा तो महिला संगठनों को साथ लेकर मुक्ति दत्ता ने अपना मुंह ढँक कर प्रेस क्लब में एक प्रेस कांफ्रेंस की. प्रेस क्लब का ऊपरी हाल खचाखच भरा था. पत्रकारों के सामने मुक्ति दत्ता ने अपने भविष्य का कार्यक्रम बताया कि कल से हम लोग कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय के सामने धरना देंगे और अंसारी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करवाएंगे.

मुक्ति दत्ता से एक पत्रकार ने कहा कि आपने मुंह क्यों ढँक कर रखा हुआ है. मुंह पर से यह कपड़ा हटाइए तभी तो पता चलेगा कि आप कौन हैं. इतने में पत्रकार तवलीन सिंह जो मुक्ति दत्ता के पास बैठी हुई थीं, उसने कहा कि आप ऐसा करने के लिए इन्हें विवश नहीं कर सकते. मैंने तवलीन सिंह से पूछ लिया कि आप पत्रकार हैं या इनका साथ देने वाली एक्टिविस्ट या इनकी प्रवक्ता? इस पर तवलीन सिंह ने एक चप्पल फेंका जो टाइम्स आफ इण्डिया के ब्यूरो प्रमुख को लगा. वहां पर इस बात पर हंगामा हो गया. हंगामे के बाद कुछ महिलाओं ने तवलीन  सिंह और मुक्ति दत्ता को एक घेरे के अंदर बचाकर बाहर निकाला. यह सब महिलायें अपनी कारों से चली गयीं. इस घटना से जेडआर अंसारी बहुत आहत हुए थे. थोड़े दिनों बाद उनकी मृत्यु हो गयी.

जगमीत उप्पल ने टाइम्स आफ इण्डिया के संपादक गिरिलाल जैन की बेटी संध्या जैन से शादी कर ली. संपादक की बेटी से शादी के बाद उनका दिमाग सातवें आसमान पर चला गया. जगमीत उप्पल टाइम्स आफ इण्डिया को गवर्नमेंट आफ इण्डिया समझने लगे थे. संपादक का दामाद बन कर वे खुद को ही संपादक समझने लगे थे. वह रात को १ बजे के बाद दारू के नशे में लोगों को फोन कर के गालियाँ देने लगे थे. एक दिन उन्होंने राज्यसभा की तत्कालीन उप सभापति नजमा हेपतुल्ला को भी रात में फ़ोन पर गालियाँ दीं. उनका परिचित एक पत्रकार आईएनएस बिल्डिंग के सामने एक दिन जगमीत उप्पल के बारे में बता रहा था कि जगमीत ने किस तरह से नजमा जी को गालियां दी थीं. दूसरे पत्रकार ने कहा कि इसमें क्या बड़ी बात है. वह तो आजकल किसी को भी रात में फोन करके गाली देता है. उसने तो कल मुझे भी फोन करके गाली दी थी.

लेखक विजेंदर त्यागी देश के जाने-माने फोटोजर्नलिस्ट हैं और खरी-खरी बोलने-कहने-लिखने के लिए चर्चित हैं. पिछले चालीस साल से बतौर फोटोजर्नलिस्ट विभिन्न मीडिया संगठनों के लिए कार्यरत रहे. कई वर्षों तक फ्रीलांस फोटोजर्नलिस्ट के रूप में काम किया और आजकल ये अपनी कंपनी ब्लैक स्टार के बैनर तले फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हैं. ''The legend and the legacy : Jawaharlal Nehru to Rahul Gandhi'' नामक किताब के लेखक भी हैं विजेंदर त्यागी. यूपी के सहारनपुर जिले में पैदा हुए विजेंदर मेरठ विवि से बीए करने के बाद फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हुए. विजेंदर त्यागी को यह गौरव हासिल है कि उन्होंने जवाहरलाल नेहरू से लेकर अभी के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तस्वीरें खींची हैं. वे एशिया वीक, इंडिया एब्राड, ट्रिब्यून, पायनियर, डेक्कन हेराल्ड, संडे ब्लिट्ज, करेंट वीकली, अमर उजाला, हिंदू जैसे अखबारों पत्र पत्रिकाओं के लिए काम कर चुके हैं. विजेंदर त्यागी से संपर्क 09810866574 के जरिए किया जा सकता है.

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