नई दिल्ली : चुनाव आयोग ने सरकार से प्रस्ताव किया है कि वह पेड न्यूज को चुनावी अपराध बनाए हालांकि वह उम्मीदवारों के चुनावी खर्च की निगरानी कर इस समस्या से खुद भी निपटना जारी रखेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त वी एस संपत ने यहां लोकसभा चुनाव कार्यक्रमों के ऐलान के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पेड न्यूज के तीन पहलू हैं, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और उम्मीदवारों द्वारा किया जाने वाला खर्च।
उन्होंने कहा कि पेड न्यूज से निपटने के लिए चूंकि कोई कानून नहीं है इसलिए हमने कानून मंत्रालय को प्रस्ताव दिया है कि वह इसे चुनावी अपराध बनाए। संपत ने कहा कि चुनाव आयोग उम्मीदवारों के खर्च की निगरानी कर खुद भी इस समस्या से निपटता है। उन्होंने कहा, 'चुनाव आयोग वही कर रहा है जो उसके नियंत्रण में है। जिलों और राज्यों में हमारी निगरानी समितियां हैं। हम संबद्ध उम्मीदवार के व्यय खाते में उसके खर्च को जोड़ देते हैं।'
प्रिंट मीडिया में पेड न्यूज की शिकायतों के बारे में संपत ने कहा कि ऐसे मामले भारतीय प्रेस परिषद को भेजे जाते हैं। उन्होंने कहा कि जहां तकइलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पेड न्यूज का सवाल है, ऐसे मामले राष्ट्रीय प्रसारणकर्ता एसोसिएशन (एनबीए) को भेजे जाते हैं। ओपिनियन पोल प्रतिबंधित करने की मांग के बारे में पूछे जाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि यह संसद को तय करना है।






