आज के समय में मुख्यधारा की पत्रिकाएं व अखबार, कारपोरेट जगत व सम्राज्यवादी ताकतों के प्रभाव में समाहित हो रही है। इस वजह से देश के चौथे स्तंभ के प्रति पाठकों में संशय उत्पन्न होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में लघु पत्रिकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। लघुपत्रिकाएं पिछलग्गू विमर्श का मंच नहीं हैं। लघु पत्रिका का चरित्र सत्ता के चरित्र से भिन्न होता है, ये पत्रिकाएं मौलिक सृजन का मंच हैं।
आज नैतिक पतन के दौर में लघु पत्रिकाओं की भूमिकाएं और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं। रचनाकार वैचारिक लेखन से दूर होते जा रहे हैं, जो समाज के लिए चिंता का विषय है। साम्प्रदायिकता का सवाल हो या धर्मनिरपेक्षता का प्रश्न हो अथवा ग्लोबलाईजेशन का प्रश्न हो हमारी व्यावसायिक पत्रिकाएं सत्ता विमर्श को ही परोसती रही हैं। सत्ता विमर्श व उसके पिछलग्गूपन से इतर लघु पत्रिकाएं अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता, संघर्षशीलता व सकारात्मक सृजनशीलता की पक्षधर हैं। इन बातों के मद्देनज़र इतना स्पष्ट है कि लघु पत्रिकाओं की आवश्यकता हमारे यहां आज भी है, कल भी थी, भविष्य में भी होगी।
"धरती" पत्रिका एक प्रतिबद्ध एवं स्तरीय लघु पत्रिका है। आज चकाचौंध वाले इस विमर्शवादी युग में जब अन्य पत्रिकाएं व्यवसायिकता और बाज़ार के प्रभाव में आती जा रही हैं ऐसे वक़्त में भी 'धरती' अपनी विशिष्ट पहचान बचाए हुए है। 'धरती' पत्रिका का अगला अंक भारतीय हिंदी मीडिया की वास्तविकता विषय पर केन्द्रित है। संपर्क करें : – संपादक – शैलेन्द्र चौहान, 34/242, सेक्टर -3, प्रताप नगर, जयपुर – 302033 (राजस्थान)। मो. न. 07838897877।
(प्रेस रिलीज)






