रायपुर : प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार बसंत तिवारी का राजधानी के सुयश अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन से पत्रकारिता जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है। प्रदेश के नेताओं सहित सभी पत्रसमूह के प्रधान संपादकों व पत्रकारों ने उनके निधन पर संवेदना प्रकट की है। श्री तिवारी ने देशबन्धु पत्र समूह को 11 वर्षों तक अपनी सेवाएं प्रदान की है।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार बसंत कुमार तिवारी के आकस्मिक निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री तिवारी के निधन से छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता के एक सुनहरे युग का अंत हो गया, लेकिन राय की पत्रकारिता के विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
स्वर्गीय बसंत कुमार तिवारी एक सजग पत्रकार, गंभीर चिंतक और विद्वान लेखक थे, जिन्होंने लगभग 50 वर्षों की अपनी पत्रकारिता में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ अपनी मंजी हुई लेखनी से छत्तीसगढ़ के सामाजिक-आर्थिक विषयों पर भी कई महत्वपूर्ण आलेख लिखे।
श्री तिवारी का राजधानी रायपुर के कोटा स्थित एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उल्लेखनीय है कि श्री तिवारी ने वर्ष 1951-52 में जबलपुर के हिन्दी दैनिक 'जयहिन्द' से अपनी पत्रकारिता की शुरूआत की थी। उन्होंने वर्ष 1952-53 से 1964 तक छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के प्रथम हिन्दी दैनिक 'महाकोशल' का सम्पादन किया और वर्ष 1965 से कई वर्षों तक दैनिक नई दुनिया से भी जुड़े रहे।
उन्होंने वर्ष 1966 से वर्ष 1980 तक रायपुर में दैनिक 'नवभारत टाइम्स' दिल्ली और मुम्बई तथा साप्ताहिक 'दिनमान' का भी प्रतिनिधित्व किया और वर्ष 1987 से 1998 तक दैनिक 'देशबन्धु' रायपुर के कार्यकारी तथा सलाहकार संपादक रहे।
श्री तिवारी वर्ष 1974 से वर्ष 1980 तक रायपुर में राष्ट्रीय समाचार एजेंसी 'यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) के ब्यूरो प्रमुख रहे। स्वर्गीय श्री वसंत कुमार तिवारी की लिखी पुस्तकों में से वर्ष 1971 में 'मध्यप्रदेश की राजनीति-बदलते चेहरे', वर्ष 1998 में मध्यप्रदेश की राजनीति-कुछ कही-कुछ अनकही', वर्ष 1999 में 'मुखौटों बाजार' तथा 'रोशनी' की 'तलाश' का प्रकाशन हुआ और ये किताबें काफी चर्चित भी हुई।
वर्ष 2006 में उनके विभिन्न आलेखों का संकलन 'समय के शब्द चित्र' प्रकाशित हुआ। इसमें उनके यूरोपीय देशों की यात्रा पर आधारित आलेख भी शामिल हैं। श्री तिवारी ने पत्रकार के तौर पर वर्ष 1975 से वर्ष 1980 के बीच दो विदेश यात्राएं की। पहली यात्रा में वह स्वीडन, डेनमार्क, हॉलेण्ड और जर्मनी गए। दूसरी यात्रा में उन्होंने मॉरिसस में आयोजित द्वितीय विश्व हिन्दी सम्मेलन की रिपोर्टिंग के लिए भारतीय समाचार एजेंसी यू.एन.आई. का प्रतिनिधित्व किया।






