: सरकार का अखबार पर हमला : छत्तीसगढ में सरकार पत्रकारों को खरीदने के बाद अब अखबार समूह को भी अपनी जेब में रखना चाहती है। हाल ही में प्रकाशन शुरू करने वाले अखबार जनदखल के तेवर देखकर सरकार के आला अधिकारी दहशत में आ गए हैं। जनदखल अखबार के फोन टेप किए जा रहे हैं और प्रबंधन को सावधान होने की धमकी दी जा रही है। दरअसल इस पूरी लडाई में सरकार अपनी कमियों को विज्ञापन के दम पर छिपाने की जुगत में लगी है। प्रदेश के अधिकांश अखबार मोटी रकम लेकर रमन राज की वाहवाही कर रहे हैं। कुछ एक अखबार हैं जो मुद्दों की बात कर रहे हैं, जिसमें एक जनदखल भी है।
एनडीटीवी के समय से ही अपनी धारदार पत्रकारिता के लिए जाने जाने वाले रीतेश साहू ने जब से जनदखल का प्रकाशन शुरू किया है, अधिकारी और नेताओं की एक-एक कर पोल खुल रही है। कई बार तो जनदखल की खबर को निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले प्रदेश के बडे़ अखबारों में जगह मिली है। ऐसे में अखबार को जनसंपर्क विभाग के मुखिया की ओर से धमकी देना पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला है। अगर सरकार विज्ञापन के दम पर प्रदेश के ढाई करोड़ लोगों की समस्याओं की अनदेखी करना चाहती है, तो यह एक खतरनाक संकेत है।
छत्तीसगढ में रमन राज में बाबू और चपरासी के घर छापा में करोड़ों की संपत्ति मिल रही है। ऐसे में पावर और माइनिंग सेक्टर में काम करने वालों की संपत्ति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यही नहीं इस विभाग के अधिकारियों की संपत्ति का भी आंकलन किया जा सकता है। जनदखल ने शुरुआती दिनों से ही इन लोगों की पोल खोलनी शुरु कर दी है। इसके बाद अब धमकी। इसका जनदखल ने अपनी लेखनी के माध्यम से विरोध शुरु कर दिया है। 11 अप्रैल के अंक में प्रकाशित यह लेख उसकी बानगी है।







