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जगजीत की अनमोल यादों की कीमत महज ग्यारह करोड़?

अगर आप ‘कादम्बिनी’ की ओर कभी -कभार भी नहीं झांकते हैं या इसके नियमित पाठक नहीं हैं, तो आपके लिये एक खबर है कि हिंदुस्तान टाइम्स प्रकाशन समूह की इस पत्रिका ने अपना नवंबर अंक जगजीत सिंह की स्मृतियों को समर्पित किया है। इस ‘‘अनफॉरगेटेबल’’ अंक में गुलजार, गुलाम अली, खैयाम, ओमपुरी, हंसराज हंस, तलत अजीज, चंदन दास, निदा फाजली, आबिदा परवीन, पंकज उधास आदि अनेक फिल्म व संगीत से जुड़ी हस्तियों ने जगजीत साहब के बारे में अपनी यादों का साझा किया है।

अगर आप ‘कादम्बिनी’ की ओर कभी -कभार भी नहीं झांकते हैं या इसके नियमित पाठक नहीं हैं, तो आपके लिये एक खबर है कि हिंदुस्तान टाइम्स प्रकाशन समूह की इस पत्रिका ने अपना नवंबर अंक जगजीत सिंह की स्मृतियों को समर्पित किया है। इस ‘‘अनफॉरगेटेबल’’ अंक में गुलजार, गुलाम अली, खैयाम, ओमपुरी, हंसराज हंस, तलत अजीज, चंदन दास, निदा फाजली, आबिदा परवीन, पंकज उधास आदि अनेक फिल्म व संगीत से जुड़ी हस्तियों ने जगजीत साहब के बारे में अपनी यादों का साझा किया है।

आप इसे दोहराव मान सकते हैं लेकिन इन सारी हस्तियों के ख़यालात जानने के बाद मालूम होता है कि जगजीत साहब जितने उम्दा फनकार थे, वे उतने ही नेक इंसान भी थे। ग़ज़ल गायकी के अलावा वे नये-नये ग़ज़ल गायकों को ढूंढते भी रहते थे और उन्हें प्रमोट भी करते थे।

अंक में रवीन्द्र कालिया का भी लेख है। कुछ बाते तो वही हैं जो उन्होंने ‘‘गालिब छूटी शराब’’ में लिखी है और कुछ नयी सूचनायें भी हैं। इनमें से एक दुखद सूचना यह है कि जगजीत सिंह साहब के पैडर रोड वाले निवास के दरवाजे पर एक नोटिस चिपका दिया गया है कि एंटीक सामानों के साथ यह फ्लैट बिकाउ है -वह भी महज 11 करोड़ में। बेशुमार-बेशकीमती ग़ज़ल गाने वाले का आशियाना इस तरह कीमत लगाकर बिके यह एक अत्यंत दुखद सूचना है। यह तो तय है कि उनकी सारी दौलत व शोहरत लेकर भी उनका बचपन लौटाया नहीं जा सकता पर क्या यहां पर उनकी स्मृति में कोई अकेडमी जैसी चीज नहीं बन सकती?

कुछ अच्छी तस्वीरें भी पत्रिका ने प्रकाशित की हैं। एक फोटो में आपका ध्यान खासतौर पर जा सकता है जिसमें चित्रा-जगजीत के साथ विवेक फुलझड़ी चला रहे हैं। जरा विवेक के मासूम चेहरे पर एक नजर डालें तो आपको वह सारी तकलीफ उसी शिद्दत के साथ समझ में आयेगी जो इन अनमोल गायकों ने झेली है। चित्रा जी का दुख तो और भी ज्यादा है जो बकौल गुलजार साहब जगजीत के जाने के बाद कोमा जैसी अवस्था में चली गयीं। कुछ दोहरावों के बावजूद जगजीत सिंह साहब के चाहने वालों के लिये यह अंक संग्रहणीय है। कांदबिनी की टीम को इस अंक के लिये शुक्रिया अदा किया जा सकता है। 

इसे भी पढ़ सकते हैं- महाशतक और डिब्बे वालों की विरह वेदना

दिनेश चौधरीलेखक दिनेश चौधरी पत्रकार, रंगकर्मी और सोशल एक्टिविस्ट हैं. सरकारी नौकरी से रिटायरमेंट के बाद भिलाई में एक बार फिर नाटक से लेकर पत्रकारिता तक की दुनिया में सक्रिय हैं. वे इप्‍टा, डोगरगढ़ के अध्‍यक्ष भी हैं. उनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है. दिनेश चौधरी के लिखे अन्य लेख को इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं… भड़ास पर दिनेश


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