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जनवाणी प्रबंधन के गलत काम नहीं करा पाए तो रिपोर्टर हुए नकारा

मेरठ और उत्तराखंड से प्रकाशन का दावा करने वाला दैनिक जनवाणी समाचार पत्र पत्रकारीय शोषण की मिसाल बनता जा रहा है। दरअसल अखबार निकालने से पहले जनवाणी अखबार का प्रबंधन रियल स्टेट, पेट्रोलियम, होटल व एक स्कूल का संचालन करते आ रहे हैं। इसमें भी तमाम तरह के फर्जीवाडे किए गए हैं, जिनका खुलासा अगली कड़ियों में होगा। इसलिए प्रबंधन के लोगों का रवैया भी पत्रकारों के साथ वही मजदूरों की तरह पेश होने वाला रहा। संस्थान की शुरुआत से ही पत्रकारों को क़ड़वे अनुभव होने शुरू हो गए। जो लंबे-चौड़े दावे जनवाणी के प्रबंधन ने किए थे, समय के साथ वह हवाई साबित होते गए।

मेरठ और उत्तराखंड से प्रकाशन का दावा करने वाला दैनिक जनवाणी समाचार पत्र पत्रकारीय शोषण की मिसाल बनता जा रहा है। दरअसल अखबार निकालने से पहले जनवाणी अखबार का प्रबंधन रियल स्टेट, पेट्रोलियम, होटल व एक स्कूल का संचालन करते आ रहे हैं। इसमें भी तमाम तरह के फर्जीवाडे किए गए हैं, जिनका खुलासा अगली कड़ियों में होगा। इसलिए प्रबंधन के लोगों का रवैया भी पत्रकारों के साथ वही मजदूरों की तरह पेश होने वाला रहा। संस्थान की शुरुआत से ही पत्रकारों को क़ड़वे अनुभव होने शुरू हो गए। जो लंबे-चौड़े दावे जनवाणी के प्रबंधन ने किए थे, समय के साथ वह हवाई साबित होते गए।

पत्रकारों को जब तक अपनी गलती का अहसास होना शुरू होता, तब तक समय बहुत आगे निकल चुका था। जनवाणी प्रबंधन ने सरकारी विभागों द्वारा अपने होटल, रियल स्टेट, स्कूल, पेट्रोल पंप आदि में ग़ड़बड़ी को लेकर जो नोटिस जारी किए थे, उन्हें निपटवाने का जिम्मा पत्रकारों को सौंप दिया। अब पत्रकार खबर की बजाय एक तरह से जनवाणी प्रबंधन के उल्टे-सीधे कामों को साधने का जरिया बनते चले गए। पहले मेरठ विकास प्राधिकरण ने रियल स्टेट के एक मामले को लेकर गॉडविन ग्रुप पर लंबा-चौ़ड़ा जुर्माना लगा दिया। जिसे हटवाने का काम उस समय प्राधिकरण देखने वाले एक सीनियर रिपोर्टर विशेष शर्मा को सौंपा गया। लेकिन करोड़ों के जुर्माने को वह कम कराने या खत्म कराने में नाकाम रहे। नतीजा विशेष को अपनी नौकरी से हाथ धोना प़ड़ा।

गॉडविन ग्रुप द्वारा वन विभाग की जमीन का बिना अनुमति अवैध रूप से इस्तेमाल करने पर वन विभाग ने नोटिस भेज दिया। इस पर वन विभाग देखने वाले रिपोर्टर गौरव मलिक की शामत आ गई। उसने दूसरे रिपोर्टरों की सहायता से ब़ड़ी मुश्किल से यह मामला निपटवाया। अभी हाल ही में गॉडविन ग्रुप की ग्रीन वुड सिटी कॉलोनी में पावर कारपोशन के अफसरों ने छापा मारा तो जनवाणी के निदेशकों की पावर अफसरों से ठन गई। जनवाणी में अपने विरोध में खबर छपने पर पावर अफसर घुटनों पर आ गए। लेकिन छापा रुकवाने में नाकाम रहने पर गौरव पर गाज गिर गई। उससे पावर बीट हटा ली गई और उसे निकालने की चेतावनी जारी कर दी।

अगले मामले में नगर निगम ने गॉडविन होटल पर लाखों रुपए का हाऊस टैक्स लगा दिया। जिसे कम कराने या हटवाने का जिम्मा बीट देख रहे मनीष राणा को सौंपा गया। लेकिन वह इसे कराने में नाकाम रहे तो उसे भी नगर निगम से हटा दिया और बेकार घोषित कर दिया। नगर निगम और महापौर के खिलाफ ऊलजुलूल खबर छपने लगी। इसके अलावा कई रिपोर्टरों के साथ हादसे हो चुके हैं। जनवाणी प्रबंधन के तानाशाही पूर्ण रवैये के कारण पत्रकार दूसरी जगह नौकरी तलाश रहे हैं या छोड़ कर जा रहे हैं। छोड़  कर जा चुके कई पत्रकार तो जनवाणी प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ लेबर कोर्ट या दूसरी संस्थाओं में शिकायत करने की तैयारी में लगे हैं। उनका कहना है कि अब जनवाणी प्रबंधन को उसकी मनमानी का सबक सिखाया जाएगा। पत्रकारों को न्याय दिलाने के लिए जनवाणी प्रबंधन की पोल खोलने के लिए यह अभियान अभी कई दिन तक चलेगा।

मेरठ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
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