जनसंदेश टाइम्स बनारस यूनिट के 'तथाकथित सर्वोत्तम संपादकीय मंडल' ने फिर वो कमाल किया जिसकी उम्मीद किसी भी अखबार के सम्पादकीय मंडल से नहीं की जा सकती। खबर फिर चन्दौली ब्यूरो से है कि 2 मई को मुगलसराय नगर में शास्त्रीय संगीत की दुनिया की नामचीन हस्ती और पद्मभूषण से सम्मानित पं. राजन-साजन मिश्र बंधु आये थे किसी संगीत संस्था का उद्घाटन करने। पं. राजन व साजन मिश्र को पूरी दुनिया उनके संगीत के लिए जानती-पहचानती है। कोई भी भारी भीड़ में भी देख ले तो पहचान जायेगा।
नगर में आने की चर्चा से 2 मई की शाम को नगर के गणमान्य लोग जुटे। मिश्र बंधु आये और लोगों को अपनी वाणी से प्रभावित किया। संगीत प्रेमियों को मिश्र बंधुओं ने संबोधित किया। लेकिन 'जनसंदेश टाइम्स' का 3 मई का अंक देखा तो भौचक्का रह गया। बड़े और मोटे अक्षरों में शीर्षक लिखा था 'संगीत के साथ नृत्य की भी दी जायेगी सीख – पीयूष।' अब बताइये अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की पहचान और पद्मभूषण से सम्मानित दो दिग्गज नगर में आते हैं, लोगों को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा देते हैं और जनसंदेश टाइम्स ऐसी हस्ती के सामने खबर छापता है संगीत संस्था के मालिक पीयूष मिश्रा की। जय हो जनसंदेश टाइम्स। पत्रकारिता की मार के रख दी है इन 'जनसंदेशियों' ने तो।

सर्वविदित है कि जिलों से कैसी खबरें आती हैं, लेकिन कोई ज़रुरी तो नहीं कि हर ख़बर हु-ब-हू वैसी ही उतारें। इसीलिए सम्पादकीय मंडल होता है जो अख़बार में जा रहे सभी कंटेंट को देखता है और फ़ैसले लेता है। लेकिन इस ख़बर को देखकर ज्ञात हो जाता है कि 'तथाकथित सर्वोत्तम सम्पादकीय मंडल' इतना कुछ गुजर जाने के बाद भी क्या कर रहा है? वैसे भी जब अखबार नौसिखियों के भरोसे रहेगा तो इससे ज्यादा की उम्मीद भी कहां की जा सकती है।
पता नहीं यह बात अख़बार के डायरेक्टर समझते हैं कि नहीं कि यही सब वजहें हैं जो उनके अख़बार को बढ़ने नहीं दे रहा है? मालिकान को समझ लेना चाहिए कि उनका अख़बार तथाकथित संपादकीय मंडल की ग़लत नीतियों के चंगुल में फँस चुका है जो अख़बार को गर्क़ में एक दिन धकेल कर ही दम लेंगे।
रीतेश कुमार






