मध्य प्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग को उन्हीं के मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने फरमान भेजा है, जिसके मुताबिक अब तहसील स्तर तक के कलम घिसने वाले भाइयों की कुंडली तैयार की जाये. इससे अहसास हो रहा है कि चुनाव करीब हैं और ऐसे में मीडिया की अनदेखी सरकार को भारी न पड़ जाये, इसलिए पत्रकारों की जमात सूचीबद्ध करने की कोशिश की जा रही है. शायद शर्मा जी को यह मालूम नहीं है कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है. शोषण का शिकार है. अखबार मालिकों का सताया है.
एक पत्रकार किसी आम व्यक्ति की समस्या के प्रति तो गंभीरता से लड़ता है, किन्तु उसका हक सदैव मारा जाता है. मगर बेचारा चौथा स्तम्भ खामोश रहता है. पत्रकारों की याद ऐसे भला कैसे आ सकती है, जो जनसंपर्क विभाग पत्रकारों को प्रेसनोट भेजने में लकवाग्रस्त दीखता है, वो इतना फिक्रमंद भला कैसे हो गया? खबर मिली की मंत्री जी की उपस्थिति में राजधानी में बैठक हुई. इसी का असर चिट्ठी के रूप में पत्रकारों तक पहुंचा. जिसका अर्थ यह है- तहसील स्तर से लेकर जिले में कार्य करने वाले पत्रकारों की सूची तैयार हो रही है.
इसलिए वाकई लिखने वाले पत्रकारों को अपनी पूरी जानकारी यानी नाम, संस्थान का नाम, परिचय पत्र की कॉपी, ई-मेल पता, मोबाइल नंबर, आवास का पता दर्ज करना होगा. आश्चर्य की बात है कि प्रदेश के जनसंपर्क दफ्तरों में शायद ही पत्रकारों का ब्योरा होगा, लेकिन मंत्रीजी के आदेश से कम से कम पत्रकार तो सूचीबद्ध हो जायेंगे. हालाँकि इसमें पत्रकारों का कितना लाभ होगा यह तो भगवन जाने. हाँ! चुनावी विज्ञप्ति जरूर आपको मिल जायेगी.
दिलीप सिकरवार
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