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जब आईएएस ज्ञानेश्वर पैंट खोल सकते हैं तो आईएएस शशि भूषण छेड़खानी क्यों नहीं कर सकते!

यूपी की नौकरशाही जो गुल न खिला दे, वह कम है। 2001 बैच के आईएएस अफसर शशि भूषण ने जो कारनामा कर दिखाया उसने पूरी आईएएस बिरादरी को कलंकित कर दिया। इस कारनामे के बाद उनको गिरफ्तार करके चौदह दिनों के लिए जेल भेजकर निलंबित कर दिया गया है। प्रदेश में विशेष सचिव प्राविधिक शिक्षा के पद पर तैनात आईएएस महोदय दिल्ली से लखनऊ आने के लिए 'लखनऊ मेल' में बैठे थे।

यूपी की नौकरशाही जो गुल न खिला दे, वह कम है। 2001 बैच के आईएएस अफसर शशि भूषण ने जो कारनामा कर दिखाया उसने पूरी आईएएस बिरादरी को कलंकित कर दिया। इस कारनामे के बाद उनको गिरफ्तार करके चौदह दिनों के लिए जेल भेजकर निलंबित कर दिया गया है। प्रदेश में विशेष सचिव प्राविधिक शिक्षा के पद पर तैनात आईएएस महोदय दिल्ली से लखनऊ आने के लिए 'लखनऊ मेल' में बैठे थे।

बताया जाता है कि रात अच्छी बीते, इसलिए उन्होंने रात की 'दवाई' भी ले रखी थी। उन्हीं के कूपे में गूगल की एक्जीक्यूटिव अपनी मां के साथ सफर कर रही थी। पड़ोस में जवान और खूबसूरत महिला को देखकर अफसर महोदय अपनी औकात में आ गए। उन्होंने इस युवती से छेड़छाड़ करना शुरू कर दिया।

शुरुआती दौर में तो यह युवती चुपचाप उनकी हरकत को झेलती रही। मगर पानी सिर से ऊपर तब निकला जब यह टायलेट के लिए उठी। तब अफसर महोदय जवानी के नशे और अपनी अफसरी के गुरूर को कंट्रोल नही कर पाये और उस युवती के साथ कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ गये। वे उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश में जुट गये।

शशि भूषण जी यह भूल गये कि यह महिला कोई ऐसी वैसी युवती नहीं थी, लिहाजा लखनऊ पहुंचते ही इस महिला ने लखनऊ जीआरपी में बलात्कार की कोशिश का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। लोगों की भारी भीड़ और इलेक्ट्रानिक मीडिया के पहुंचने के बाद इस बात के अलावा कोई और चारा भी नहीं बचा था कि अफसर महोदय को गिरफ्तार कर उन्हें जेल यात्रा करवाई जाये।

लिहाजा शशि भूषण को गिरफ्तार कर लिया गया। जीआरपी के इंस्पेक्टर ने शुरुआती दौर में इस अफसर के रुतबे को देखकर उन्हें बचाने की कोशिश भी की मगर देश भर में भारी हंगामे के बाद जब लगा कि मामला ज्यादा तूल पकड़ गया तो आनन-फानन में इंस्पेक्टर को ही हटा दिया गया। मगर इससे यह तो सिद्ध हो गया कि रेलवे पुलिस शुरुआती दौर में इस अफसर के प्रभाव में थी। शशि भूषण बुलंदशहर और गाजियाबाद जैसे जिलों के डीएम रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी से नौकरशाही में हड़कंप मच गया।

प्रदीप शुक्ला की गिरफ्तारी से पहले से भयभीत आईएएस एसोसिएशन के कुछ सदस्य सक्रिय भी हुए और उन्होंने कहा कि यह संभव नही है कि चलती ट्रेन में कोई अफसर इस तरह की छेड़खानी करे। मगर उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि पढ़ी लिखी नौकरीपेशा युवती आखिर किस कारण से किसी अफसर पर इस तरह के आरोप लगाएगी। जब उनसे कहा गया कि एक आईएएस ज्ञानेश्वर पाटिल को पूरी दुनिया ने देखा कि वह अपने कार्यालय में ही पैंट उतारे, अपने ही एक कर्मचारी से समलैंगिक संबंध बनाने की कोशिश कर रहे थे। उनकी उतरी हुई पैंट पूरी दुनिया ने देखी।

जब एक आईएएस अफसर अपने कार्यालय में ही इस तरह अपनी पैंट उतार सकता है तो दूसरा आईएएस चलती ट्रेन में एक महिला के साथ छेडखानी कैसे नहीं कर सकता। दरअसल आईएएस अफसरों के अंदर एक खतरनाक प्रवृत्ति जन्म ले रही है। उन्हें लगता है कि वह कुछ भी करेंगे उनके रुतबे के आगे कोई कुछ नही बोलेगा। यूपी के ही एक चर्चित अफसर अपने जिले के कार्याकाल में खासे चर्चित रहे हैं। अपने अधीनस्थ महिला कर्मचारी को शुरुआती दौर में मैसेज भेजने और बाद में फोन पर उनसे घंटों प्रेम भरी बातें करने के लिए उनकी ख्याति पूरे प्रदेश भर में रही है।

नोएडा में अपनी तैनाती के दौरान एक महिला से प्रेम प्रसंग के चलते उनके परिवार और महिला के परिवार में भी खासा बवाल हो गया था। आजकल यह प्रदेश में एक महत्वपूर्ण पद पर तैनात हैं। शशि भूषण ने अपने बचाव में कहा है कि युवती के बैग गिर जाने के कारण विवाद हो गया था। जब युवती ने उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम शशि भूषण लाल बताया तो युवती ने उन्हें जातिसूचक शब्द कहे। शशि भूषण की इस बात में कितना दम है इसका अंदाजा सभी लगा सकते हैं।

यूपी की नौकरशाही लगातार अपने कारनामों से पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। आर्थिक पतन से चारित्रिक पतन तक नई नई गाथायें अफसरों की शान पर बट्टा लगा रही हैं। राजधानी लखनऊ में अफसरों की करोड़ों की कोठियां और फ्लैट यह बताने को काफी हैं कि आखिर इस प्रदेश के नौकरशाह किस रास्ते पर जा रहे हैं। माया सरकार में पैसा कमाने के लिए कुछ अफसरों ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। बड़े से बड़े अफसर केवल दलाल बनकर रह गये थे। दुख की बात यह है कि सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ अफसर दलाल फिर दलाली की भूमिका में नजर आने लगे हैं। जो हाशिए पर है वह मुख्यधारा में आने के लिए भरसक कोशिश कर रहे हैं और कोई बड़ी बात नही है कि वह जल्दी ही अपना मुख्यधारा में नजर आयें। जबकि बढिया काम करने वाले कई अफसर अभी भी महत्वहीन पोस्टिंग पर तैनात कर दिए गये है।

यूपी की नौकरशाही को पहला झटका प्रदीप शुक्ला की गिरफ्तारी के साथ लगा। अपने राजनैतिक संबंधों के चलते प्रदीप शुक्ला को यह गुरूर था कि उन पर सीबीआई जैसी संस्था भी कभी हाथ नही डाल सकती। मगर जिस तरह से उनकी गिरफ्तारी हुई उससे यूपी की बेईमान नौकरशाही को एक झटका जरूर लगा।

इस झटके से उबर भी नही पायीं आईएएस बिरादरी शशि भूषण के मामले को लेकर सकते की हालत में है। एसोसियेशन के कुछ लोगों ने इस बात की कोशिश करी कि किसी भी तरह शशिभूषण के निलंबन को टाला जा सके क्योंकि नियमत: 48 घंटे जेल में रहने के बाद स्वत: अफसर निलंबित हो जाता है। यह बात दीगर है कि प्रदीप शुक्ला जैसे अफसरों पर यह नियम नहीं लागू होता। एसोसियेशन शशिभूषण को भी इसी श्रेणी में रखना चाहती थी, मगर कामयाब नहीं हो सकी।

लेखक संजय शर्मा यूपी के वरिष्ठ पत्रकार हैं. इन दिनों वीकएंड टाइम्स के संस्थापक और प्रधान संचालक के रूप में कार्यरत हैं.

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