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जब दिल्ली में दूरदर्शन हो सकता है तो बंगाल में बंगदर्शन क्यों नहीं!

Ravish Kumar : बंग सरकार अपना चैनल और अख़बार लाएगी। केंद्र सरकार की तरह। जब दिल्ली में दूरदर्शन हो सकता है तो बंगाल में बंगदर्शन क्यों नहीं। मध्य प्रदेश, गुजरात, यूपी, बिहार में क्यों नहीं। सबको मीडिया चाहिए। राजनीतिक दलों की पत्रिकाएं किसी कूड़े के ढेर से कम नहीं। इन्हें छापने वाले लोग हाथ में लिए नेताओं के यहां घूमते रहते हैं। पार्टी के भीतर ही कम लोग पढ़ते हैं। विश्वसनीयता किसी के पास नहीं है। सबने ज़िम्मेदारी की दुकानदारी की है। सोशल मीडिया ही समानांतर मीडिया है। यह वैकल्पिक नहीं है। जब सरकारें, राजनीतिक दल इनके ज़रिये जनमत में घालमेल करने की कोशिश करती हैं तब ठीक लेकिन जब इसके सेनानी उल्टें सरकार या दल के खिलाफ बोलने लगते हैं तो परेशानी होने लगती हैं। राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय दल सब मीडिया और केबल टीवी में धंधा कर रहे हैं और नियंत्रण कर रहे हैं। इसलिए सोशल मीडिया को अपनी ताकत बेहतर करने का वक्त आ गया है। एक ही कमज़ोरी है। एक व्यक्ति को डराना आसान होता है। असीम त्रिवेदी पर राष्ट्र द्रोह का मुकदमा चलता है मगर उसी संसद पर हमला करने वाले अण्णा पर राष्ट्र द्रोह का नहीं चलता। नेता का बिगाड़ नहीं सकते तो समर्थकों की तलाश करो। फिर इस सवाल का जवाब भी नहीं देते कि संसद की गरिमा किसने गिराई। नेताओं ने या सोशल मीडिया के कार्टून ने।

Ravish Kumar : बंग सरकार अपना चैनल और अख़बार लाएगी। केंद्र सरकार की तरह। जब दिल्ली में दूरदर्शन हो सकता है तो बंगाल में बंगदर्शन क्यों नहीं। मध्य प्रदेश, गुजरात, यूपी, बिहार में क्यों नहीं। सबको मीडिया चाहिए। राजनीतिक दलों की पत्रिकाएं किसी कूड़े के ढेर से कम नहीं। इन्हें छापने वाले लोग हाथ में लिए नेताओं के यहां घूमते रहते हैं। पार्टी के भीतर ही कम लोग पढ़ते हैं। विश्वसनीयता किसी के पास नहीं है। सबने ज़िम्मेदारी की दुकानदारी की है। सोशल मीडिया ही समानांतर मीडिया है। यह वैकल्पिक नहीं है। जब सरकारें, राजनीतिक दल इनके ज़रिये जनमत में घालमेल करने की कोशिश करती हैं तब ठीक लेकिन जब इसके सेनानी उल्टें सरकार या दल के खिलाफ बोलने लगते हैं तो परेशानी होने लगती हैं। राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय दल सब मीडिया और केबल टीवी में धंधा कर रहे हैं और नियंत्रण कर रहे हैं। इसलिए सोशल मीडिया को अपनी ताकत बेहतर करने का वक्त आ गया है। एक ही कमज़ोरी है। एक व्यक्ति को डराना आसान होता है। असीम त्रिवेदी पर राष्ट्र द्रोह का मुकदमा चलता है मगर उसी संसद पर हमला करने वाले अण्णा पर राष्ट्र द्रोह का नहीं चलता। नेता का बिगाड़ नहीं सकते तो समर्थकों की तलाश करो। फिर इस सवाल का जवाब भी नहीं देते कि संसद की गरिमा किसने गिराई। नेताओं ने या सोशल मीडिया के कार्टून ने।

        Zishan Haider Naqvi Yani patrakaro ko rozgar k aur awsar milenge. Achcha hai
 
        Prakash Singh de mara… phir mara
 
        Amardeep Purewal Punjab mein bhi PTC Hai……
   
        Shiv Kumar Srivastava ‎:)
    
        Rajesh Srivastava Mai mamta ko ek hi rai dunga ,, uchsrinkhal hoyea kono labh nae,, nitish thekea mamta kea sikhtea hobea ,, kahea governance bola hoy ,,
 
        Padampati Sharma Kya karoge Bhai rajnetaon Ke liye ek hi bat kahi ja sakti hai- meetha-meetha Gap-Gap khara-khara Thoo-Thoo.
   
        Vinay Verma Momta ka poribartan ho gaya hai !;)
    
        Majid Azmi Padampati Sir@ waqaii sir in char lafzon me aapne rajnetaon ki saari kahani aur sara falsafa hi bayan kar diya..kisi bhi rajneta ko aaj apni aalochna pasand nahi..matlb bhi yahi huaa ki ghalat bhi karo aur koi sach bhi na kahe..

टीवी जर्नलिस्ट रवीश कुमार के फेसबुक वॉल से साभार.

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