Anjli Dubay : छत्तीसगढ़ का अभी हाल में पैदा हुआ चैनल ''आईबीसी'' अपनी उड़ान के चलते ही अपने अंजाम की ओर पहुँचता लग रहा है ..पिछले दिनों 'जी' से करार खत्म होने के बाद आईबीसी नाम से एक नए चैनल का जन्म हुआ ..लोगों को बताया गया ..छत्तीसगढ़ की राजधानी को पोस्टरों से पाट दिया गया ..कर्मचारी भाग न जाएँ इसके लिए कई तरह के आश्वासन पिलाए गए..इसके बाद अचानक प्रबंधन का मन हुआ कि चलो अब मध्यप्रदेश में भी पैर पसारे जाएँ ..हड़बड़ी में गड़बड़ी की कहावत यहाँ सत्य साबित होती नजर आई..
जल्द ही प्रबंधन को समझ आ गया कि मध्यप्रदेश को संभाल पाना कोई हँसी खेल नही है …सो जल्दबाजी में कुछ अपाइमेंट कर लिए गए ..बंसल न्यूज से अपनों चहेतों को बुलाकर भर्ती कर लिया गया ..शुरू शुरू में तो अच्छी खासी सैलरी की बात कर ली गई लेकिन तब भी काम नहीं बना क्योंकि मध्यप्रदेश की डेस्क को संभालना हँसी खेल तो है नहीं इसलिए भाई लोगों ने तय किया कि कुछ और भर्तियाँ की जाएँ…
दैनिक भास्कर में विज्ञापन निकाला गया ..संस्थान में काम करने वालो से रिकमंड करने को कहा गया ..बायोडाटा का पहाड़ खडा हो गया ..इसके बाद आउटपुट डेस्क के लिए भोपाल इंदौर हैदराबाद से लोगों को बुलाया गया ..लोगों से गिड़गिडा़ने के अंदाज में 30 अप्रैल को आने की दरख्वाहस्त की गई ..कई लोगों ने रिजरवेशन न होने की बात कही तो उन्हें भी आग्रह कर मना लिया गया ..तीस तारीख की सुबह चौदह लोग रायपुर पहुँचे ..अंदर जाते ही लोगों को एक फार्म जैसा कि 'जी
24 घंटे' के राज में भराया जाता है, भराया गया जिसमें माँ बाप भाई बहन सबकी जानकारी माँगी गई थी ..इसके बाद एक लिखित परीक्षा का ड्रामा कराया गया ..जिसमें कुछ एक शब्द वाले और दो डेढ़ सौ शब्दों वाले प्रश्न शामिल थे..
परीक्षा के बाद एक घंटे का अंतराल हुआ ..इस अंतराल के बाद सभी को बैठाकर इंटरव्यू के लिए इंतजार करने को कहा गया ..परीक्षार्थी इंतजार कर रहे थे ..एक घंटे के इंतजार के बाद अचानक निशी जो रिशेप्शन में मौजूद थीं, परीक्षार्थियों के पास आईं और कहा कि आप लोग वापस जा सकते हैं ..आपका इंटरव्यू नहीं है ..लोगों के शोर मचाने पर कहा गया कि आपके इंटरव्यू भोपाल में होंगे ..परीक्षा देने आए सारे लोग अच्छे संस्थानों में अच्छे पदों पर कार्यरत हैं, बेचारे अपना अपमान सह कर वापस लौट आए..
इसके दो दिन बाद ही आईबीसी की टीम भोपाल के माखनलाल विश्वविद्यालय की खाक छानती नजर आई ..नए नवेलों से इंटरव्यू परीक्षा का ड्रामा किया गया ..दो दिन के इस तामझाम के बाद भोपाल के डीबी माल में स्ट्रिंगर और रिपोर्टर के इंटरव्यू आयोजित किए गए …इसमें भी अनुभवहीन लोगों की तादात ज्यादा थी ..इंदौर से आए एक अनुभवी रिपोर्टर से किए गए सवाल की बानगी देखिए.. ''इंदौर शहर में मिनरल वाटर बनाने की कितनी फैक्ट्रियाँ हैं..''
मीडिया के हमारे मित्र समझ गए होंगे कि अब आईबीसी का ध्यान किस ओर है ..बिचारे चौदह लोगों को आजतक काल नहीं किया गया है ..इन्हें सस्ते दामों में काम करने वाले मजदूर चाहिए जो किसी भी तरह चुनावी वैतरणी पार करा दें ..जाहिर है दर्शक जनता को मूर्ख समझा जा रहा है और इस गलतफहमी का असर भी देखने मिलने लगा है अब आईबीसी टीआरपी में नजर आती नहीं दिखती …अनुभवी लोग बाय बाय कर चुके हैं या करने वाले हैं ..इसके अलावा जिन लोगों को यूँ बेमतलब बिना इंटरव्यू के बैरंग लौटाया गया है वो तो इस चैनल के कसीदे पढ़ने से रहे ..सवाल यह है कि जब माखनलाल की फैक्ट्री से ही कच्चा माल उठाना था तो तीस अप्रैल को लोगों को क्यों बुलाया गया, क्यों परेशान किया गया, क्यों अपनी साख पर बट्टा लगाया इस चैनल ने ..चैनल तो वैसे भी चल ही जाएगा जैसे भारत समाचार और दूसरे चल रहे हैं ..क्वालिटी और स्तर की बात तो भूल ही जाइए अब आप …
अंजलि दुबे के फेसबुक वॉल से.






