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जब स्‍वयंभू ‘भगवान’ नंगे होने लगे तो षड़यंत्र से यशवंत और मुकेश को जेल भिजवाया

मुंगेर। भड़ास4मीडिया डाट काम के संपादक और ई-हिन्दी न्यूजपेपर के इतिहास पुरूष यशवंत सिंह और राजनामा डाट काम के संपादक मुकेश भारतीय की गिरफ्तारी ने विश्व के सामने यह प्रमाणित कर दिया है कि देश के कारपोरेट प्रिंट और इलेक्‍ट्रानिक मीडिया हाउसों के मालिकों और संपादकों को जब ‘भगवान’ से ‘आदमी’ बनाने की मुहिम चली तो उनलोगों ने सरकार में शामिल कुछ प्रमुख और प्रभावशाली लोगों और भ्रष्ट पुलिस पदाधिकारियों को प्रभाव में लेकर उनकी गिरफ्तारी की घटना को अंजाम दिया।

मुंगेर। भड़ास4मीडिया डाट काम के संपादक और ई-हिन्दी न्यूजपेपर के इतिहास पुरूष यशवंत सिंह और राजनामा डाट काम के संपादक मुकेश भारतीय की गिरफ्तारी ने विश्व के सामने यह प्रमाणित कर दिया है कि देश के कारपोरेट प्रिंट और इलेक्‍ट्रानिक मीडिया हाउसों के मालिकों और संपादकों को जब ‘भगवान’ से ‘आदमी’ बनाने की मुहिम चली तो उनलोगों ने सरकार में शामिल कुछ प्रमुख और प्रभावशाली लोगों और भ्रष्ट पुलिस पदाधिकारियों को प्रभाव में लेकर उनकी गिरफ्तारी की घटना को अंजाम दिया।

इन गिरफ्तारियों ने यह भी प्रमाणित कर दिया है कि भारत में अधिकांश कोरपोरेट प्रिंट और इलेक्‍ट्रानिक मीडिया हाउस आर्थिक भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं। जब भड़ास4मीडिया डाट काम और राजनामा डाट काम में मीडिया और इलेक्‍ट्रानिक मीडिया हाउस के आर्थिक भ्रष्टाचार और अन्य खामियों की खबरें प्रमुखता से साक्ष्य के आधार पर आने लगी, तो मीडिया हाउस ने भविष्य के दुष्परिणाम की संभावना को देखते हुए इतिहास पुरूष यशवंत सिंह और मुकेश भारतीय की गिरफ्तारी की साजिश की और साजिश को कार्यान्वित किया। मेरी नजर में यह स्वभाविक है।

पाठक खुद सोंचे। देश के प्रभावशाली प्रिंट और इलेक्‍ट्रानिक मीडिया हाउस के मालिक और संपादक हमेश इस धरती का ‘भगवान’ अपने आपको समझते रहे हैं। जिस प्रकार ‘भगवान’ मौत का फरमान जारी करते हैं, मीडिया हाउस के मालिक और संपादक सरकारों को तहस-नहस करने का फरमान जारी करते हैं और फरमान के अनुरूप मीडिया में अभियान चलाते हैं। क्या न्यायपालिक, क्या कार्यपालिका, क्या व्यापारिक संस्थाएं और क्या आम आदमी? देश का हर व्यक्ति मीडिया से ऐसा थर-थर कांपता है मानो ‘भूत’ से सामना हो गया हो। आप किसी भूतपूर्व मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री से मीडिया की ताकत के बारे में पूछें तो पता चल जाएगा कि मीडिया क्या चीज है? किस प्रकार देश की सबसे उंची कुर्सी पर विराजमान व्यक्ति मीडिया से यूं ही कांप रहा है यह सोच कर कि मीडिया कब और कहां नुकसान कर देगा।

केन्द्र और राज्यों में मीडिया हाउस ने पिछले दशकों में अनेक सरकारों को उलट देने का काम भी किया? परन्तु मीडिया के विस्तार और ई -न्यूजपेपर के आने के बाद प्रिंट और इलेक्‍ट्रानिक मीडिया हाउस के स्वयंभू ‘भगवान’ को अपनी औकात नजर आने लगीं। आर्थिक अपराध में डूबे मीडिया हाउस की सनसनीखेज जालसाजी और अरबों-खरबों के सरकारी राजस्व की लूट की खबरों के भड़ास4मीडिया डाट काम और राननामा डाट काम में प्रकाशित होने के बाद मीडिया हाउस के स्वयंभू ‘भगवान’ के असली चेहरे के बेनकाब होने से अस्तित्‍व पर खतरा नजर आने लगा और परिणति यशवंत सिंह और मुकेश भारतीय की गिरफ्तारी है। संपादक द्वय ने मीडिया हाउस के घनघोर शोषण की खबरों को छापकर विश्व के सामने मीडिया हाउस को एक प्रकार से नंगा कर दिया कि मीडिया जो दूसरों के शोषण की खबरें प्रमुखता से छापता है, वह खुद अपने कलम के सिपाहियों का आर्थिक और मानसिक शोषण किस हद तक दशकों से करता आ रहा है?

देश का कानून अपना काम कर रहा है। पूरी उम्मीद है कि यशवंत सिंह और मुकेश भारतीय को न्याय मिलेगा और वे लोग सभी आरोपों से मुक्त होंगे। यहां यह बताते चलें कि बिहार के मुंगेर में भी देश के एक शक्तिशाली मीडिया हाउस ने स्वर्गलोक से एक अनुसूचित जाति की ‘परी’ को मुंगेर की धरती पर उतारा और मीडिया हाउस से कानूनी लड़ाई लड़ रहे स्ट्रिंगर से उसका स्तन पकड़वा दिया। पर, मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के सामने मामले को लाने के बाद मीडिया हाउस की स्वर्ग लोक से उतरी कथित ‘परी’ अपनी खूबसूरती के साथ स्वर्ग लोक लौट गई और पुलिस ने न्यायालय में अंतिम प्रतिवेदन यह कहकर समर्पित कर दिया कि आरोपकर्ता महिला धरती पर नहीं है।

कारपोरेट प्रिंट और इलेक्‍ट्रानिक मीडिया हाउस तो उस आंख को ही फोड़ देना चाहता है जो आंख उनकी कारगुजारियों और आर्थिक भ्रष्टाचार पर तीखी नजर रखती है। और जो उनकी कारगुजारियों और आर्थिक भ्रष्टाचार को अपने ई-पेपर में लगातार छापकर कथित ‘भगवान’ को आम ‘आदमी’ बनाने की मुहिम चल रहा है, तो उन्हें कितना गुस्सा आता होगा और बदले में उनके शरीर का हर कण किस प्रकार तड़पता होगा, यह जख्मी व्यक्ति ही समझ सकता है? इस बीच, मुंगेर के वरीय अधिवक्ता व पत्रकार काशी प्रसाद, बिपिन कुमार मंडल, आर0टी0आई0 एक्टिविस्ट मंटू शर्मा ने उत्तर प्रदेश और झारखंड के मुख्यमंत्रियों से संपादक द्वय की गिरफ्तारी की जांच अपनी निगरानी में कराने और उन्हें न्याय दिलाने की गुहार की है।

लेखक श्रीकृष्‍ण प्रसाद पत्रकार, एक्टिविस्‍ट तथा अधिवक्‍ता है. पिछले काफी समय से वे मीडिया के भीतर की गड़बडि़यों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं. इनसे संपर्क -09470400813 के जरिए किया जा सकता है.


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