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जवाहरलाल दर्डा को यूके के हाउस ऑफ कॉमंस ने मरणोपरांत लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया

लंदन। स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और कुशल राजनेता दिवंगत जवाहरलाल दर्डा ‘बाबूजी’ को यूके के हाउस ऑफ कॉमंस ने मरणोपरांत लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया है. बाबूजी को यह सम्मान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और देश सेवा के लिए दिया गया. ब्रिटेन के भारत के साथ व्यावसायिक सहयोग मामलों के मंत्री ग्रेगरी बार्कर और भारत-ब्रिटिश सर्वदलीय संसदीय समूह के चेयरमैन वीरेंद्र शर्मा ने यह अवार्ड स्व. जवाहरलाल दर्डा के बेटे सांसद और लोकमत मीडिया के एडिटर-इन-चीफ विजय दर्डा को सौंपा.

लंदन। स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और कुशल राजनेता दिवंगत जवाहरलाल दर्डा ‘बाबूजी’ को यूके के हाउस ऑफ कॉमंस ने मरणोपरांत लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया है. बाबूजी को यह सम्मान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और देश सेवा के लिए दिया गया. ब्रिटेन के भारत के साथ व्यावसायिक सहयोग मामलों के मंत्री ग्रेगरी बार्कर और भारत-ब्रिटिश सर्वदलीय संसदीय समूह के चेयरमैन वीरेंद्र शर्मा ने यह अवार्ड स्व. जवाहरलाल दर्डा के बेटे सांसद और लोकमत मीडिया के एडिटर-इन-चीफ विजय दर्डा को सौंपा.

इस अवसर पर भारत संबंधी मामलों की शैडो विदेश मंत्री कैरी मैककार्थी, भारी उद्योग व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री प्रफुल्ल पटेल, संसदीय मामलों और योजना राज्यमंत्री राजीव शुक्ला, उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय में मंत्री प्रो. अभिषेक मिश्र और प्रीति पटेल, पॉल उप्पल, सीमा मल्होत्र, बॉब बैकमैन और अग्रणी अनिवासी भारतीयों सहित संसद के कुछ ब्रिटिश सदस्य भी मौजूद थे. समारोह के दौरान पुराने दिनों को याद करते हुए विजय दर्डा ने कहा जब महात्मा गांधी के आव्हान पर जब पूरे भारत में चेतना जागृत हुई थी तो मेरे पिताजी भी 17 बरस की उम्र में राष्ट्रपिता से मिलने का बाद स्वतंत्रता के आंदोलन में कूद पड़े थे. दर्डा ने कहा, बाबूजी ने गिरफ्तारी से पहले मध्य भारत के यवतमाल से दिल्ली की तरफ 400 मील की पदयात्र पर कूच किया था. उन्होंने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और उन्हें एक वर्ष और नौ माह की कैद की सजा हुई थी. स्वतंत्रता के बाद उन्होंने आम लोगों में शिक्षा और जागरुकता को अपना ध्येय बना लिया था. दर्डा ने कहा कि खासतौर पर ग्रामीण भारतीयों के लिए इस ध्येय की पूर्ति उन्होंने सक्रिय पत्रकारिता के साथ की.

दर्डा ने आगे कहा कि समाज के प्रति अपने योगदान को केवल पत्रकारिता तक ही सीमित न रखते हुए उन्होंने कांग्रेस पार्टी के जरिये सक्रिय राजनीति में कदम रखा. धीरे-धीरे तरक्की करते हुए वे तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के करीबी विश्वासपात्र बन गए थे. एक कुशल प्रशासक और लोकप्रिय व्यक्ति बाबूजी का चार बार राज्य विधान परिषद के लिए चुनाव हुआ और उन्होंने महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल में 1978 से 1995 के दौरान अनेक वरिष्ठ मंत्रीपद बखूबी संभाले. इसी काल में बाबूजी ने उद्योग, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कपड़ा, खाद्य व नागरिक आपूर्ति, सिंचाई, पर्यावरण और खेल के क्षेत्रों में भरपूर योगदान दिया.

इससे पहले विजय दर्डा ने अपने पिता के सम्मान के लिए इंडो-यूके ऑल पार्टी संसदीय समूह का धन्यवाद दिया. उन्होंने ब्रिटिश इंडिया पब्लिक अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन निपुण शर्मा का इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए विशेष तौर पर शुक्रिया अदा किया. अपने संबोधन में ग्रेगरी बार्कर ने भारत-ब्रिटेन के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध आज जितने मजबूत कभी नहीं थे.

उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति इसी तरह से जारी रहेगी और 2030 तक वह दुनिया की तीन शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगा. उन्होंने कहा कि हमारा भारत के उज्ज्वल भविष्य में पूरा विश्वास है. बार्कर से सहमति जताते हुए प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि अर्थशास्त्र ही दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाएगा. उन्होंने कहा कि बेंगलुरु-मुंबई कॉरिडॉर डवलपमेंट के अलावा भी दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग है. भारतीय छात्रों के बड़ी संख्या में अमेरिका जाने पर ध्यान दिलाते हुए पटेल ने कहा कि ऐसी कोई वजह नहीं दिखती जिससे यहां भारतीय छात्र ज्यादा से ज्यादा संख्या में उच्चशिक्षा के लिए न आएं.

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