नई दिल्ली : भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्कडेय काटजू ने मीडिया को फिर निशाने पर लेते हुए कहा कि वह अंधविश्वास और रूढि़वादिता को बढ़ावा देकर सामाजिक और आर्थिक मुद्दों से लोगों का ध्यान हटा रहा है। काटजू ने आरोप लगाया है कि दर्शकों की संख्या में इजाफे और ज्यादा कमाई के लिए मीडिया घराने ऐसा कर रहे हैं। काटजू ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गुरुवार को जारी बयान में कहा, भारत में हालिया प्रवृत्ति दर्शाती है कि मीडिया प्रतिक्रियात्मक भूमिका निभा रहा है, जबकि इसके बदले उसे वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना चाहिए। मीडिया फिल्म अभिनेताओं, क्रिकेट, भविष्यवाणी समेत अन्य गैर मुद्दों को बढ़ावा दे रहा है।
उन्होंने मीडिया कर्मियों से विवेक के साथ वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने, अंधविश्वास को समाप्त करने की सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वाहन का अनुरोध किया। काटजू ने कहा, वैज्ञानिक सोच से गरीबी, बेरोजगारी और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से निपटा जा सकता है। इस बारे में कोई शक नहीं कि भारत में ज्यादातर मीडिया उद्योगपतियों के नियंत्रण में है, जिसे उन्होंने धन कमाने के लिए स्थापित किया है। कमाई करना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन सामाजिक जिम्मेदारियों को दरकिनार करके ऐसा करना सही नहीं है।
जस्टिस काटजू ने कहा, संविधान का अनुच्छेद 19(1) मीडिया को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है। इसके साथ ही अनुच्छेद 51 ए(एच) भी है, जिसमें कहा गया है कि सभी नागरिकों का कर्तव्य है कि वह देश में वैज्ञानिक माहौल बनाने के साथ ही मानवीय विचारों के साथ देश सुधार के काम करेंगे। उन्होंने कहा, मीडिया कर्मी अपने मूलभूत अधिकारों के प्रति बहुत सजग है, पर वह अपने कर्तव्यों को भूल जाते हैं। (एजेंसी)





