Mayank Saxena : जब लाइव इंडिया के कर्मचारी बिना सैलरी के अंधेरी दीवाली का मर्सिया पढ़ रहे थे…ये वही शख्स था, जो ट्विटर पर अपने परिवार की दमकती दीवाली की बात कह रहा था…शर्मनाक तरीके से तस्वीरें शेयर कर रहा था…आज ये वही आदमी होने वाला है, जो कल रंगों में डूब कर होली मनाएगा…जबकि एक साथी ज़िंदगी से जंग लड़ रहा है…
आप इसे पत्रकार और सम्पादक मानते हैं, मुझे ऐसे आदमी के इंसान तक होने पर शक है…चौधरी साहब हम शर्मिंदा हैं कि हम भी पत्रकार हैं और आप भी…हम शर्मिंदा हैं कि हम वहीं काम करते हैं, जहां आप…हम शर्मिंदा हैं कि हम ने आपका नाम भी सुना…हम शर्मिंदा हैं कि हमें ये लिखना पड़ रहा है… चौधरी साहब आपको होली बहुत बहुत मुबारक हो…
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Mayank Saxena : हमारे जानदार साथी अमरीश आखिरकार संघर्ष कर के ज़िंदगी की जंग में जीत रहे हैं…उनकी हालत पहले से बेहतर है…और अब वो ख़तरे से बाहर हैं…लेकिन हम सबके लिए असली लड़ाई दरअसल अब शुरू होगी…
युवा व तेजतर्रार पत्रकार मयंक सक्सेना के फेसुबक वॉल से.






