मुंगेर। पटना उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति माननीय अंजना प्रकाश के आदेश के आलोक में विश्वस्तरीय 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन फर्जीवाड़ा में पुलिस कार्रवाई की रफ्तार से परेशान अखबार के नामजद अभियुक्तगण बिहार के सीएम नीतीश कुमार और डीजीपी अभ्यानन्द को निशाने पर ले चुके हैं। नामजद अभियुक्तों की शह पर जिलावार अवैध संस्करण और विज्ञापन फर्जीवाड़ा में फंसे अन्य हिन्दी और अंग्रेजी अखबारों का प्रबंधन और संपादकीय समूह भी मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को बदनाम करने में जुट गया है।
दैनिक हिन्दुस्तान और अन्य हिन्दी अखबार अपने पटना के संस्करणों में मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और सरकार से जुड़ी खबरों को कुछ विशेष ढंग से प्रकाशित कर रहे हैं। साथ ही राज्य के दर्जनों जिलों में प्रकाशित हो रहे अवैध संस्करणों में भी छोटी-छोटी घटनाओं को काफी बढ़ा-चढ़ाकर प्रकाशित किया जा रहा है। दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन फर्जीवाड़ा से जुड़े पटना उच्च न्यायालय के 17 दिसंबर 2012 के ऐतिहासिक आदेश के बाद की तिथियों के 38 जिलों के जिलावार संस्करणों की समीक्षा करने पर अखबार प्रबंधन और संपादकीय समूह का षडयंत्र अपने-आप ही उजागर हो जायेगा। अवैध संस्करण और विज्ञापन फर्जीवाड़ा में लिप्त अखबारों की कोशिश जनता को इन दिनों यह बताने की हो रही है कि ''बिहार में जंगल राज पुनः लौट आ रहा है''।
उदाहरण के तौर पर 1 फरवरी को मुंगेर में घटित घटना को लें। एक अल्पसंख्यक छात्रावास के नामकरण को लेकर घेराव, प्रदर्शन और जुलूस का आयोजन किया गया। दिनभर जमकर नारेबाजी होती रही। छिटपुट पथराव की घटना घटी। तीन व्यक्तियों को मामूली चोटें आईं। इस खबर को अभियुक्तों ने दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण में प्रथम पृष्ठ पर पूरे आठ कालम में काफी उत्तेजक रूप में प्रस्तुत किया। अखबार के प्रकाशित खबर के शीर्षक और कवरेज के स्वरूप से कोई पाठक अंदाजा लगा सकता है कि आखिर अखबार मुंगेर जिले में क्या चाहता है? अमन-चैन या और कुछ?
प्रकाशित समाचार को पूरी दुनिया के समक्ष इस समाचार के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है जिससे पाठक कुछ अपनी राय कायम कर सकें। दैनिक हिन्दुस्तान हर क्षण ऐसे मौके की तलाश में है जिससे जिला पदाधिकारी कुलदीप नारायण और पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन को ‘‘अक्षम‘‘ साबित किया जा सके और प्रदेश सरकार इन दोनों अफसरों को मुंगेर से बाहर कर सके।

जिलाधिकारी कुलदीप नारायण और पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन ने हिंदुस्तान प्रबंधन को नाकों चने चबवा रखा है। हिंदुस्तान की मालकिन से लेकर प्रधान संपादक और अन्य कई लोग विज्ञापन घोटाले में फंसे हुए हैं। ऐसे में हिंदुस्तान अखबार इन अफसरों से बदला लेने पर उतारू है।
मुंगेर के जिलाधिकारी कुलदीप नारायण और पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन की रिपोर्ट के कारण ही पटना उच्च न्यायालय में विश्वस्तरीय 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन फर्जीवाड़ा में शोभना भरतिया सहित सभी नामजद अभियुक्तगण मुकदमा हार गए थे। इन अफसरों की रिपोर्ट पर पटना उच्च न्यायालय ने संतोष प्रकट किया। इस कारण से दैनिक हिन्दुस्तान जिला प्रशासन की छवि को धूमिल करने का हर संभव प्रयास कर रहा है।
अभियुक्तों की गिरफ्तारी किसी समय हो सकती है : पटना उच्च न्यायालय के 17 दिसंबर के इस फैसले के बाद मुंगेर कोतवाली कांड संख्या-445/2011 के नामजद अभियुक्त श्रीमती शोभना भरतिया (अध्यक्ष, मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड, नई दिल्ली), अमित चोपड़ा (पूर्व प्रकाशक, मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड, नई दिल्ली), शशि शेखर (प्रधान संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान, नई दिल्ली), अवध कुमार श्रीवास्तव उर्फ अकू श्रीवास्तव (पूर्व संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान, पटना संस्करण, पटना) और बिनोद बंधु (पूर्व स्थानीय संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान, भागलपुर संस्करण, भागलपुर) के गर्दन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। बिहार पुलिस अब नामजद अभियुक्तों को किसी भी क्षण गिरफ्तार कर सकती है। सभी नामजद अभियुक्त भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420/471 और 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धाराएं 8 (बी), 14 और 15 के अन्तर्गत आरोपित हैं।
मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नं. -09470400813 के जरिए किया जा सकता है.
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