जो नईदुनिया कभी अपनी भाषा की शुद्धता और खबरों की विश्वसनीयता के लिए जाना जाता था, उसमें प्रूफ की ढेरों गलतियां तो काफी पहले शुरू हो चुकी थीं, लेकिन अब तथ्यों की गलतियां भी बहुतायत में मिलने लगी हैं। आंतरिक राजनीति, खराब माहौल और नौसिखिया तथा अधकचरे रिपोर्टरों की भर्ती का असर अखबार में साफ दिखाई देने लगा है। अखबार का कोई ऐसा पेज नहीं होता, जिसमें गलतियां न हों। इंदौर संस्करण के 13 अप्रैल के अंक से दो उदाहरण संलग्न हैं।
पृष्ठ 6 पर प्रकाशित एक खबर- रिपोर्ट दर्ज करवाने वाली महिला के खिलाफ होगा केस दर्ज में इस बात का कहीं पता नहीं चलता कि यह घटना इंदौर के किस मोहल्ले या थाना क्षेत्र की है। खबर में लिखा गया है कि मृतक पहले महिला के पति के खिलाफ बयान देता था। बाद में वह पति के खिलाफ बयान देने लगा। इससे महिला नाराज हो गई। यदि मृतक पहले भी पति के खिलाफ बयान देता था और बाद में भी पति के खिलाफ ही बयान दे रहा था तो महिला नाराज क्यों हो गई। रिपोर्टर को खुद नहीं मालूम कि वह लिख क्या रहा है और शायद उसे कोई देखता भी नहीं।
इसी तरह पेज 10 पर शीर्षक है- जिसने की आराधना, पूरी हुई सब साधना। संपादक महोदय ही जानें कि वे इस शीर्षक के जरिए आखिर कहना क्या चाहते हैं। संभवत: तुकबंदी के चक्कर में यह प्रयोग किया गया है।


एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






