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जागरण ने जिसे मुर्दा बता कर श्राद्ध तक करा दिया, वो खुद आकर बोला- ‘मैं जिंदा हूं पत्रकार भाइयों’

: झूठी खबरें छाप रहा जागरण, जीवित को किया मृत : ऐसे तो दैनिक जागरण को फालतू खबरें छापने में महारत हासिल है लेकिन जब कोई खबर छपे और वो बिलकुल झूठ हो तो खबर लिखने वाले पत्रकार की काबिलियत को समझा जा सकता है. मालूम हो कि 11 सितम्बर को बिहार के औरंगाबाद संस्करण के पृष्ठ संख्या 3 पर एक खबर कार्यालय संवाददाता के डेटलाइन से छपी, ''श्राद्ध कार्यक्रम में मशगूल थे ग्रामीण ''शीर्षक से.

: झूठी खबरें छाप रहा जागरण, जीवित को किया मृत : ऐसे तो दैनिक जागरण को फालतू खबरें छापने में महारत हासिल है लेकिन जब कोई खबर छपे और वो बिलकुल झूठ हो तो खबर लिखने वाले पत्रकार की काबिलियत को समझा जा सकता है. मालूम हो कि 11 सितम्बर को बिहार के औरंगाबाद संस्करण के पृष्ठ संख्या 3 पर एक खबर कार्यालय संवाददाता के डेटलाइन से छपी, ''श्राद्ध कार्यक्रम में मशगूल थे ग्रामीण ''शीर्षक से.

मैं जिंदा हूं : जनार्दन

मैं जिंदा हूं : जनार्दन

इसमें लिखा गया था कि कर्मा लहंग गांव में जनार्दन सिंह की मौत हो जाने के कारण श्राद्ध का कार्यक्रम आयोजित किया गया था. यह तथ्य बिलकुल गलत है. इस झूठी खबर के छप जाने के बाद जनार्दन सिंह खुद पत्रकारों के सामने प्रस्तुत हुए और कहने लगे कि देखिये, मै जिन्दा हूं परन्तु दैनिक जागरण वालों ने मुझे जिन्दा ही मार दिया. इतना ही नहीं, मेरा श्राद्ध तक करवा डाला. अब दैनिक जागरण पर क्यों व कैसे भरोसा किया जाए?

जनार्दन के इस वक्तव्य से वहां मौजूद सभी मीडिया कर्मियों के सर शर्म से झुक गए. एक पत्रकार की गलती ने पूरे पत्रकार बिरादरी को शर्मसार कर दिया. उल्लेखनीय है कि कर्मा लहंग गांव दिल्ली गैंगरेप के एक आरोपी अक्षय ठाकुर का गांव है. अक्षय को सजा सुनाए जाने को लेकर साइड स्टोरी के तहत उसके गांव का हाल प्रकाशित किया गया. इसी हालचाल के प्रकाशन के दौरान गांव के एक व्यक्ति जनार्दन को मरा बताकर उसका श्राद्ध भी करा दिया गया.

यह पहला वाकया नहीं है. इसके पहले भी जागरण वालों ने प्रथम पृष्ठ पर औरंगाबाद की ही एक खबर ''आँचल को बनाया कफ़न'' के नाम से बाटम स्टोरी छापी थी. इसमें कहा गया था कि ढिबरा थाना के नावां गाँव निवासी रामचंद्र रिकियाशन की मौत एड्स से हुई थी और उसकी पत्नी ने अपने आँचल को फाड़ कर उसका कफ़न बनाया और शव को कंधे पर टांगकर नजदीक के जमीन में दफ़न कर दिया. बाद में पता चला कि रामचंद्र रिकियासन जीवित है. यह खबर भड़ास पर छपी तो जागरण के पत्रकारों को काफी फजीहत झेलनी पड़ी थी. फिर भी जागरण वाले नहीं सुधरे और इस बार भी एक जीवित व्यक्ति जनार्दन सिंह को मार कर उनका श्राद्ध तक करा दिया. धन्य हो जागरण वालों.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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